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उत्तर प्रदेश में अब छुट्टी ही छुट्टी, काम से ‘कुट्टी’!

यूपी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों तोहफा देते हुए कुछ और नई छुट्टियों का ऐलान किया है। अब यूपी में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के जन्मदिन पर भी छुट्टी मिलेगी। इन दो छुट्टियों को मिलाकर यूपी में सरकारी कर्चमारियों को मिलने वाली छुट्टियों की तादाद अब 141 हो गई है।
इनमें मेडिकल लीव शामिल नहीं है। यानी कि इन 141 छुट्टियों के अलावा भी कर्मचारी छुट्टियां ले सकते हैं। कर्मचारियों की तनख्वाह के मुताबिक अगर छुट्टियों की बात करें तो एक दिन की छुट्टी पर सरकार के करीब एक अरब इक्कीस करोड़ रुपए बर्बाद होते हैं। ऐसे में कुछ संगठनों से अब सरकार से मांग उठानी शुरू कर दी है कि सरकारी कर्मचारियों के काम के घंटे बढा दिए जाएं।
141 छुट्टियों की ये संख्या बाकी राज्यों से कहीं ज्यादा है। खुद बिहार में भी, जहां कर्पूरी ठाकुर ने काम किया, उनके नाम पर कोई छुट्टी नहीं होती। पर सियासी फैसलों के चलते यूपी में छुट्टियां 141 तक जा पहुंचीं। सरकार के रवैये से उत्साहित अब तमाम और संगठनों ने भी छुट्टियां मांगनी शुरू कर दी हैं।
जानकारों की मानें तो यूपी में ज्यादातर छुट्टियों के पीछे सियासी दलों का सियासी गणित है। मसलन ब्राह्मण वोटरों को खुश करने के लिए परशुराम जयंती का ऐलान किया गया। इसी तरह मुस्लिमों को खुश करने के लिए हजरत अली का जन्मदिन और ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के उर्स की छुट्टी।
सिंधी समाज के लिए चेटीचंद जयंती। निषाद समाज के लिए निषाद जयंती की तो वैश्य समाज के लिए अग्रसेन जयंती की छुट्टी। मुस्लिमों की मांग पर अलविदा की नमाज की भी छुट्टी घोषित की जा चुकी है। विश्वकर्मा जयंती और बाल्मिकी जयंती भी खास तबकों को खुश करने के लिए की गई।
दिलचस्प ये है कि मायावती सरकार ने काशीराम जयंती और काशीराम निर्वाण दिवस पर छुट्टी कर दी थी। बाद में सपा सरकार ने ये दोनों छुट्टियां रद्द कर दीं। छुट्टियों की तादाद को देखते हुए तमाम संगठनों ने अब यूपी में वर्क आवर बढ़ाने की मांग उठने लगी है।

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