फ़र्ज़ी IAS का कारनामा
https://husainijnp.blogspot.com/2015/05/ias.html
बस्ती। पूर्वाचल ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक को अर्दब में लेकर छह लाख
रुपये अपने खाते में मंगा लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाज
ने खुद को कमिश्नर बताते हुए दैवी आपदा राहत के मद से खुद के बताए खाता
नंबर 455720110000051 में स्थानांतरित करा लिया। इस फरेब में सदर तहसील
में तैनात एक कानूनगो भी शामिल थे, जिसने बैंक जाकर आपने मोबाइल से यह
बैंक के मैनेजर से यह कहकर बात कराई थी कि कमिश्नर साहब बात करना चाहते
हैं। पुलिस ने प्रबंधक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। पूर्वाचल
ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक सतीश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक गुरुवार
को पूर्वान्ह 10 बजे के आसपास तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो राम
सूरज बैंक पर पहुंचे और उनसे कहा कि कमिश्नर साहब बात करेंगे। मोबाइल
7857043275द्ध लेने पर दूसरी तरफ से आवाज आई कि मैं कमिश्नर बोल रह हूं। छह लाख रुपये स्थानांतरित करने का निर्देश देकर खाता संख्या और अन्य
जानकारी नोट कराया। प्रबंधक हकीकत में कमिश्नर का फोन जानकर छह लाख रुपये
उक्त खाते में भेज दिया। चूंकि आरटीजीएस प्रणाली से रकम भेजने के लिए चेक
या नकद रकम की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए कानूनगो ने कुछ देर की
मोहलत मांग ली। यह मामला तब खुला जब वादे के मुताबिक कानूनगो चेक लेकर
बैंक नहीं गया। शाखा प्रबंधक उसे खोजते एडीएम प्रताप सिंह भदौरिया के पास
पहुंचे तो पता चला कि उनके साथ धोखा हो गया।
रुपये अपने खाते में मंगा लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाज
ने खुद को कमिश्नर बताते हुए दैवी आपदा राहत के मद से खुद के बताए खाता
नंबर 455720110000051 में स्थानांतरित करा लिया। इस फरेब में सदर तहसील
में तैनात एक कानूनगो भी शामिल थे, जिसने बैंक जाकर आपने मोबाइल से यह
बैंक के मैनेजर से यह कहकर बात कराई थी कि कमिश्नर साहब बात करना चाहते
हैं। पुलिस ने प्रबंधक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। पूर्वाचल
ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक सतीश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक गुरुवार
को पूर्वान्ह 10 बजे के आसपास तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो राम
सूरज बैंक पर पहुंचे और उनसे कहा कि कमिश्नर साहब बात करेंगे। मोबाइल
7857043275द्ध लेने पर दूसरी तरफ से आवाज आई कि मैं कमिश्नर बोल रह हूं। छह लाख रुपये स्थानांतरित करने का निर्देश देकर खाता संख्या और अन्य
जानकारी नोट कराया। प्रबंधक हकीकत में कमिश्नर का फोन जानकर छह लाख रुपये
उक्त खाते में भेज दिया। चूंकि आरटीजीएस प्रणाली से रकम भेजने के लिए चेक
या नकद रकम की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए कानूनगो ने कुछ देर की
मोहलत मांग ली। यह मामला तब खुला जब वादे के मुताबिक कानूनगो चेक लेकर
बैंक नहीं गया। शाखा प्रबंधक उसे खोजते एडीएम प्रताप सिंह भदौरिया के पास
पहुंचे तो पता चला कि उनके साथ धोखा हो गया।

