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ग्राम प्रधानी का चुनाव टालने पर हाईकोर्ट सख्त कहा, यूपी में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश क्यों न की जाए

इलाहबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रदेश में पंचायत चुनावों में लेकर हो रही देरी पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए बहुत ही तल्ख़ टिप्पणी की है.
एक याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि पंचायत चुनाव पांच साल के अंदर न करवाने की वजह से संवैधानिक संकट पैदा हो गया है. जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है.
कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी करते हुए कहा है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश क्यों न कि जाए.
दरअसल मामला प्रदेश में ग्राम पंचायत के प्रधान पद के चुनाव को टालने का है. एक जनहित याचिका में जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत चुनाव कराये जाने और प्रधान और सदस्य पद के चुनाव स्थगित करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी.
गौरतलब हैं कि याचिका में 5 सितम्बर को पंचायतीराज के द्वारा जारी शासनादेश को चुनौती दी गई है. याचिका के अनुसार उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग ने ग्राम प्रधानों और ग्राम सभा सदस्यों के आरक्षण को अगला आदेश आने तक स्थगित कर दिया गया है. जिला पंचायत अध्यक्षों के आरक्षण की सूची जारी कर दी गई है, बीडीसी चुनाव भी अपने तय समय पर ही होंगे.।

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