पति-पत्नी हैं बेरोजगार, सरकार से किराया चाहिए पूरे 72 हजार
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लंदन में एक घर का मुखिया 8 साल से बेरोजगार है। उसकी पत्नी 17 साल से बेरोजगार है। पर उनके पूरे 8 बच्चे हैं। इंग्लैंड के सामाजिक न्याय और बेहतर परवरिश के नियम कानूनों के चलते सरकार उनके खर्च का बोझ उठा रही है। पर, ये परिवार अपनी बढ़ती मांगों के चलते सरकार के लिए ही सिरदर्द बन गया है।
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में ली और कैटरीना नाम के पति-पत्नी रहते हैं, जिनके 8 बच्चे हैं। उन्हें सरकार से हर माह 56 हजार रुपये घर के किराये के रूप में मिलते हैं, जो सीधे मकान मालिक को जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई फ्री है। उनका भोजन फ्री है। और, रहना भी फ्री है। पर अब इस दंपत्ति ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है, कि उन्हें 4 बेडरूम वाले घर से दिक्कत हो रही है इसलिए उन्हें कम से कम 8 बेडरूम वाला घर चाहिए। इसका किराया कम से कम 1000 यूरो बैठेगा, जो भारतीय करेंसी में 72 हजार रुपयों के आसपास है। उनका कहना है कि वो किराया दे नहीं सकते, वहीं जीना भी जरूरी है। ऐसे में सरकार ही उनका खर्च उठाए।
ली की नौकरी 8 साल पहले रिटेल मैनेजर के तौर पर थी, जो चली गई। वहीं, कैटरीना के पास 1998 से कोई जॉब नहीं है। ली और कैटरीना को सरकार की तरफ से सामाजिक सुरक्षा के तौर पर मिलने वाले चाइल्ड टैक्स क्रेडिट, चाइल्ड बेनिफिट, विकलांगता भत्ता और बेरोजगारी भत्ता भी मिलता है। उनका कहना है कि लंदन के बाहर तो सस्ते घर मिल जाएंगे, पर वो इसी जगह पर 20 सालों से रह रहे हैं। ऐसे में वो अपनी सामाजिकता से दूर जाकर नई जिंदगी नहीं शुरू कर सकते। सरकार मौजूदा समय में उन्हें 800 यूरो यानि 56 हजार रुपयों के आसपास घर के किराये के तौर पर हर माह देती है, जबकि उनकी मांग ज्यादा की है। दोनों का कहना है कि जबतक उनमें से किसी एक की नौकरी नहीं लग जाती, तबतक सरकार से खर्च भी उठाए।
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में ली और कैटरीना नाम के पति-पत्नी रहते हैं, जिनके 8 बच्चे हैं। उन्हें सरकार से हर माह 56 हजार रुपये घर के किराये के रूप में मिलते हैं, जो सीधे मकान मालिक को जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई फ्री है। उनका भोजन फ्री है। और, रहना भी फ्री है। पर अब इस दंपत्ति ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है, कि उन्हें 4 बेडरूम वाले घर से दिक्कत हो रही है इसलिए उन्हें कम से कम 8 बेडरूम वाला घर चाहिए। इसका किराया कम से कम 1000 यूरो बैठेगा, जो भारतीय करेंसी में 72 हजार रुपयों के आसपास है। उनका कहना है कि वो किराया दे नहीं सकते, वहीं जीना भी जरूरी है। ऐसे में सरकार ही उनका खर्च उठाए।
ली की नौकरी 8 साल पहले रिटेल मैनेजर के तौर पर थी, जो चली गई। वहीं, कैटरीना के पास 1998 से कोई जॉब नहीं है। ली और कैटरीना को सरकार की तरफ से सामाजिक सुरक्षा के तौर पर मिलने वाले चाइल्ड टैक्स क्रेडिट, चाइल्ड बेनिफिट, विकलांगता भत्ता और बेरोजगारी भत्ता भी मिलता है। उनका कहना है कि लंदन के बाहर तो सस्ते घर मिल जाएंगे, पर वो इसी जगह पर 20 सालों से रह रहे हैं। ऐसे में वो अपनी सामाजिकता से दूर जाकर नई जिंदगी नहीं शुरू कर सकते। सरकार मौजूदा समय में उन्हें 800 यूरो यानि 56 हजार रुपयों के आसपास घर के किराये के तौर पर हर माह देती है, जबकि उनकी मांग ज्यादा की है। दोनों का कहना है कि जबतक उनमें से किसी एक की नौकरी नहीं लग जाती, तबतक सरकार से खर्च भी उठाए।

