एक साथ उठी 6 अर्थियां,कोहराम बरपा
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रतनगढ़ | हरियाणा के हांसी में दो वाहनों की भिड़ंत में एक परिवार के सात सदस्यों की मौत के बाद सोमवार सुबह गांव जांदवा में छह सदस्यों का अंतिम संस्कार किया गया। घर से छह अर्थियां एक साथ उठीं तो कोहराम मच गया। इधर, मृतका माना देवी का अंतिम संस्कार उसके ससुराल गांव गौरीसर में किया गया। शनिवार देर रात हुई घटना के बारे में जिसने भी सुना उसकी आंखे नम हो गई।
सोमवार सुबह छह सदस्यों के शव गांव में पहुंचे। गांव में सन्नाटा पसर गया। शोक की लहर छा गई। कुछ सदस्यों की हालत देख ग्रामीणों ने मेडीकल टीम बुलाकर उनका उपचार करवाया। परिजनों और लोगों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। जब एक घर से छह अर्थियां निकली तो ग्रामीणों की आंखे नम हो गई।
इनकी हुई थी मौत
शनिवार रात हरियाणा के हांसी के पास कार एवं कैंटर के मध्य हुई दुर्घटना में कार में सवार एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौत हो गई थी। इसमें धन्नाराम के सबसे बडे पुत्र हड़मानाराम (60), छोटे पुत्र मूलाराम, पोते विनोद उर्फ मनोज (20), पुत्रवधू मूंगीदेवी (58), पुत्रवधू रुकमणीदेवी (58), पुत्रवधू महिमा (50) व गौरीसर निवासी बेटी मानादेवी (70) की मौत हो गई थी। परिवार के सदस्य सुंदर देवी खीचड़ की अर्थियां विर्सजित करके वापस गांव जांदवा लौट रहे थे। परिवार के लोग सुंदरदेवी की मृत्यु पर पांच दिन से शोक संतप्त थे। लोग शोक में थे। लेकिन किसी को पता नहीं था कि यह घटना लोगों का दिल दहला देगी। इस घटना के बाद से गांव के लोगों में मायूसी छाई हुई है।
सोमवार सुबह छह सदस्यों के शव गांव में पहुंचे। गांव में सन्नाटा पसर गया। शोक की लहर छा गई। कुछ सदस्यों की हालत देख ग्रामीणों ने मेडीकल टीम बुलाकर उनका उपचार करवाया। परिजनों और लोगों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। जब एक घर से छह अर्थियां निकली तो ग्रामीणों की आंखे नम हो गई।
इनकी हुई थी मौत
शनिवार रात हरियाणा के हांसी के पास कार एवं कैंटर के मध्य हुई दुर्घटना में कार में सवार एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौत हो गई थी। इसमें धन्नाराम के सबसे बडे पुत्र हड़मानाराम (60), छोटे पुत्र मूलाराम, पोते विनोद उर्फ मनोज (20), पुत्रवधू मूंगीदेवी (58), पुत्रवधू रुकमणीदेवी (58), पुत्रवधू महिमा (50) व गौरीसर निवासी बेटी मानादेवी (70) की मौत हो गई थी। परिवार के सदस्य सुंदर देवी खीचड़ की अर्थियां विर्सजित करके वापस गांव जांदवा लौट रहे थे। परिवार के लोग सुंदरदेवी की मृत्यु पर पांच दिन से शोक संतप्त थे। लोग शोक में थे। लेकिन किसी को पता नहीं था कि यह घटना लोगों का दिल दहला देगी। इस घटना के बाद से गांव के लोगों में मायूसी छाई हुई है।

