जापान की रेलवे बना रही है कछुओं के लिए खास क्रोसिंग
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जापान। माना जा रहा है कि अब जापान के कछुओं के साथ कुछ अलग और खास व्यवहार किया जाएगा। आप सोच रहे होंगे कछुओं के साथ कैसा कैसा खास व्यवहार? तो हम आपको बता दें कि अपने खास खोल की मजबूती की कारण मशहूर इन कछुओं के लिए अब जापानी रेलवे खास क्रौसिंग बनाने जा रही है।
इस क्रौसिंग के जरिए कछुओं की मृत्यु दर में भी गिरावट आऐगी।
पश्चिम जापान रेलवे कंपनी ने हाल ही में सूमा एक्वालाईफ पार्क के साथ पार्टनरशिप की है ताकि कछुओं के लिए सुरक्षित ट्रैक का निर्माण कर सके।
जापान के कोबे शहर इस विशेष रेलवे क्रॉसिंग का घर होगा।
हमने कभी एसा नही सोचा था कि हम कछुओं के लिए बने एक ऐसे क्रौसिंग को देख पाऐंगे, जिसके जरिए वो ट्रेन ट्रैक्स को आसानी से पार पाऐंगे।
आस-पास पटरियों रहने वाले कछुए पर कई सालों से चल रहे मुद्दे, इस काम में और भी देरी का कारण भी बन रहे है।
वो अधिकतर रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाते है, और वहां या तो फंस जाते थे या खुद को या फिर ट्रैक को नुकसान पहुंचा देते है।
इस क्रौसिंग बनने के बाद उनके पास खुद का एक चलने के लिए रास्ता होगा!
इस क्रौसिंग को ‘टर्टल एस्केप टनल्स’ के नाम से जाना जाता है, और उन्हे कोब के ऐसे क्षेत्रों में लगाया गया है जहां सबसे ज्यादा दिक्कत आती है।
इस क्रौसिंग ने अभी तक 10 एक्सीडेंट्स होने से बचा लिया। क्योकि उन कछुओं ने अपने लिए बने इस ट्रैक से बिना किसी डर के और रुकावट के रास्ता पार किया था।
इस ट्रैक से अब यह धीमी गति से चलने वाला जानवर भी मस्ती से घूम सकेगा, और वो भी बिना किसी रुकावट के, चिंता के।
इस क्रौसिंग के जरिए कछुओं की मृत्यु दर में भी गिरावट आऐगी।
पश्चिम जापान रेलवे कंपनी ने हाल ही में सूमा एक्वालाईफ पार्क के साथ पार्टनरशिप की है ताकि कछुओं के लिए सुरक्षित ट्रैक का निर्माण कर सके।
जापान के कोबे शहर इस विशेष रेलवे क्रॉसिंग का घर होगा।
हमने कभी एसा नही सोचा था कि हम कछुओं के लिए बने एक ऐसे क्रौसिंग को देख पाऐंगे, जिसके जरिए वो ट्रेन ट्रैक्स को आसानी से पार पाऐंगे।
आस-पास पटरियों रहने वाले कछुए पर कई सालों से चल रहे मुद्दे, इस काम में और भी देरी का कारण भी बन रहे है।
वो अधिकतर रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाते है, और वहां या तो फंस जाते थे या खुद को या फिर ट्रैक को नुकसान पहुंचा देते है।
इस क्रौसिंग बनने के बाद उनके पास खुद का एक चलने के लिए रास्ता होगा!
इस क्रौसिंग को ‘टर्टल एस्केप टनल्स’ के नाम से जाना जाता है, और उन्हे कोब के ऐसे क्षेत्रों में लगाया गया है जहां सबसे ज्यादा दिक्कत आती है।
इस क्रौसिंग ने अभी तक 10 एक्सीडेंट्स होने से बचा लिया। क्योकि उन कछुओं ने अपने लिए बने इस ट्रैक से बिना किसी डर के और रुकावट के रास्ता पार किया था।
इस ट्रैक से अब यह धीमी गति से चलने वाला जानवर भी मस्ती से घूम सकेगा, और वो भी बिना किसी रुकावट के, चिंता के।



