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अकीदत से मनाया गया शहीदे आजम इमाम हुसैन का चेहल्लुम

अजमी रिज़वी 
बाराबंकीं। शहीदाने कर्बला का चेहलुम आज जिले में अकीदत एहतराम से मनाया गया। इस अवसर पर आलमपुर, देवरा सादात, भटिया, मोतिकपुर, असन्द्रा, कादिरपुर, बेलांव सहित कई कस्बे एवं गांवों में मजलिस मातम के साथ अलम ताजिये के जुलूस भी निकले। शहर में पहली मजलिस कर्बला सिविल लाइन्स के नगराम हाउस स्व0 अल्हाज शुजाअत रिज़वी के आवास पर सम्पन्न हुई जिसको प्रोफेसर मौ0 तकी रज़ा ने सम्बोधित करते हुए कहा- कोई मजहब बुराई नहीं सिखाता, मजहब वाले बुराई फैलाते हैं। पहले इन्सान बनें फिर मुसलमान बनें फिर मोमिन बनें, मोमिन मोमिन का आईना होता है। मोमिन मोमिन का भाई है। रिश्ता अगर खुलूस के साथ हो तो वो रिश्ता है, वरना सिर्फ कहानी है। अन्त में शहीदाने कर्बला के चेहल्लुम पर मसायब पढे जिसे सुनकर अज़ादार रो पड़े। मजलिस से पूर्व हैदर रिज़वी, सरवर अली रिज़वी ने पढ़ा- ताजिये रख रहें हैं अहले हुनूद, जगमगाते हैं आस्था के चराग। राह जन्नत की देखिये सरवर मदहे शब्बीर में जलाके चराग। डा0 रज़ा मौरानवी ने कलाम पेश करते हुये पढ़ा- शैतान को सर पर बिठा लेना कहीं, लालच में गरदन को फसां लेना कभी। हक भाई का जो दाबे हुये बैठे हो, अब्बास का परचम उठा लेना कहीं। मजलिस के बाद ज़िया, शाने हैदर ने नौहाख्वानी की, अलम का जुलूस निकाला गया। जो नौहे मातम के साथ कर्बला पहुुंचा जहां चेहलुम की मजलिस को प्रोफेसर तकी रज़ा ने खिताब करते हुए कहा कि राहे खुदा में वोह दो जो तुम्हें सबसे ज्यादा पसन्द हो। एक के बदले अल्लाह 10 देगा। यहां जैसा बोओगे, आखेरत में वैसा काटोगे। मौलाना तकी ने ये भी कहा कि अल्लाह सबके साथ इन्साफ करता है, अगर किसी ने किसी का हक मारा है तो महशर में बहुत महंगा पड़ेगा। हुकूमत सब करेंगें ताकि कयामत में ये कह सके कि मेरी हुकूमत होती तो मैं भी अद्ल कायम कर देता। अन्त में हजरत इमामे हुसैन (0) और 72 शहीदों के चेहलुम पर दर्दनाक मसायब पढ़े। इसके बाद ज़ियारते अरबईन पढ़ाई गई। अन्त में षहवेज़, परवेज़ ने नौहा पढ़ा- भैय्या तेरे चेहलुम के लिये आई है ज़ैनब। इसके बाद अज़ाखाना कफील हैदर में मजलिस हुई जिसको प्रोफेसर तकी रज़ा ने खिताब किया। इसके बाद ज़िया ने नौहा पढ़ा। वहीं बीती रात सिविल लाइन्स स्थित अतहर हुसैन एडवोकेट के अवास पर इमामें जुमा मौ0 मोहम्मद रज़ा जैदपुरी ने मजलिस को खिताब किया। वहीं पीरबटावन स्थित खतीबे कर्बला स्व0 आरिफ रज़ा मजलिसी के अवास पर ऐतिहासिक मर्सिया ख्वानी सम्पन्न हुई। मर्सिया ख्वान हैदर नवाब जाफरी ने अपने खास अन्दाज में मर्सिया पढ़ते हुये कहा- एक ख्वाब की ताबीर हकीकत कर ली, प्यासे ने समुन्द्र पे हुकूमत कर ली। कहती हुई चुल्लू में चली आई फरात, अब्बास तेरे हाथ पे बय्यत कर ली। इससे पूर्व डा0 रज़ा मौरानवी बाकर नक्वी ने नजरानये अकीदत पेश की। बाद मजलिस कलीम इब्ने आज़र बाराबंकवी ने नौहाख्वानी की। जैदपुर, फतेहपुर, बदोसरांय, बेलहरा, किन्तूर, चन्दवारा, असन्द्रा, मोतिकपुर, आलमपुर, देवरा, मीरापुर, बिलांव, कुर्सी, मित्तई, केसरवा, मौथरी, देवां शरीफ, सराय इस्माईल, भानमऊ, कादिरपुर, मिर्चिया, बेड़हारी, रसूलपुर, सेमरी, सरायमीर, हैदरगढ़, जरगांवां के अलावा कई गावों और कस्बों में मजलिस मातम के साथ अलम, ताजिये के जुलूस निकलें। कार्यक्रम की समाप्ति पर कर्बला सिविल लाइन्स के खादिम रिज़वान मुस्तफा ने प्रशासन सहित सभी का शुक्रिया अदा किया।


बदोसरांय में निकला चेहल्लुम का जुलूस

बाराबंकी। कस्बा बदोसरायं में अंजुमन--जुल्फेकार हैदरी के द्वारा चेहल्लुम का जुलूस या हुसैन या अली की सदाओं के बीच निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की सहादत की याद में पूर्व संध्या पर सलमान मियां के कदीमी इमामबाड़े में रातभर महिलाओं की मजलिस देर रात तक चलता रहा। सुबह 10 बजे बड़े इमामबाड़े से ताबूत, ताजिया, अलम के साथ चेहल्लुम जुलूस निकाला गया और कर्बला ले जाकर या हुसैन या अली की सदाओं के बीच सुपुर्द--खाक कर दिया गया। इस अवसर पर अंजुमन--जुल्फेकार हैदरी के साहबे बयाज मीशम, मजाहिर हसन, जुहैर, निसार मेंहदी, बब्लू, फुरकान, रानू, अहसन, अली हैदर, चांद बाबू, तसद्दुक, साकिर आदि ने नोहा ख्वानी करके नजराने अकीदत पेश किया।

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