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श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़

जौनपुर। रसरूप आत्मा और महारस रूप परमात्मा से सगुण मिलन को महारास कहते हैं। महारास की गोपी के 3 गुण होते हैं। भगवान के भक्त की साड़ी प्रेम का श्रृंगार समर्पण की नथुनी है। महारस में में शंकर भगवान समर्पण की नथुनी न पहनने के कारण गोपी नहीं बन सके और पोल खुल गयी। हरिहर का मिलन देन गोपियां व देवतागण जयजयकार करने लगे। उसी समय भागवत को महापुराण की उपाधि मिली। उक्त विचार मां शीतला चौकियां धाम में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के 7वें दिन संत शिरोमणि आत्म प्रकाश जी महाराज ने व्यक्त किया। उन्होंने अन्त में बताया कि भगवान के बाद दुनिया में सबसे प्यारा नाम मां है। इस दौरान कथा संगीतमय होने से भजन गायक राम मोहन ने अपने भजनों की माला से एक-एक अमृतवाणी मोती भजनों से लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टण्डन, सदर विधायक नदीम जावेद, पूर्व सांसद धनंजय सिंह, नवीन सिंह, विपिन कुमार माली के अलावा सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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