आयतुल्लाह शैख़ निम्र को फांसी दिये जाने के विरोध में सऊदी, अमेरिका, इसराईल का पुतला फूंका
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। सऊदी अरब के मशहूर शिया धर्म गुरु शेख बाकर अल निम्र समेत उनके भाई व भतीजे को सऊदी अरब ने दो जनवरी 2016 को बेगुनाह फंासी की सजा देकर शहीद कर दिया। वह सऊदी अरब की एक जानी-मानी हस्ती थे। जो काफी वर्षो से सऊदी अरब में मनावाधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। सऊदी अरब के इस शर्मनाक कार्य के चलते आज दुनिया भर में शेख निम्र की हिमायत में एहतेजाजी जलसा किया गया। मौलाना गुलाम अस्करी हाल में मौलाना सै. तस्दीक हुसैन रिजवी की सदारत में एहतेजाजी जलसा आगाज हुआ। जिसमें सैकड़ो लोगों ने शिरकत की। इमामे जुमा मौलाना सै. मोहम्मद रजा ने खिताब करते हुये कहा कि सऊदी तानाशाह ने मजलूम धर्मगुरु को शहीद करके अपनी इंतेहाई दरिंदगी का परिचय दिया है। जिनका जवाब उन्हे एक दिन देना होगा। शेख निम्र को गिरफ्तार हुये तीन साल से अधिक समय हो रहा है और उन्हे सजाये मौत देना खुला अन्याय है। उन्होने कहा कि सऊदी हुकूमत यह न समझे कि शेख निम्र को फांसी देकर हक की आवाज को दबा देगी। शेख निम्र की शहादत सऊदी जालिम हुकूमत की ताबूत की आखिरी कील साबित होगी। मौलाना इब्ने अब्बास ने कहा पूरी दुनिया में आतंकवाद फैलाने के लिये डालर मद्द देने वाला यही सऊदी अरब है और अमेरिका व इसराईल हैं। सऊदी हुकूमत का इस्लाम से कोई लेना देना नही है।
वह केवल इस्लाम के नाम का नकाब पहने हुये हैं। अगर यह मुसलमान होते तो फिलिस्तीन, यमन, बहरैन, ईराक व सीरिया में हो रहे जुल्म के खिलाफ भी बोलते। उसके उलट ये आईएस-आईएस जैसे आतंकी संगठनो का साथ देता है। मौलाना अता मेंहदी ने खिताब करते हुये कहा इमाम हुसैन (अ.स.) के रास्ते पर चलकर सिर तो कटा सकते हैं लेकिन सिर झुका नही सकते हैं। शेख बाकर निम्र ने अपनी शहादत देकर यह साबित कर दिया। मौलाना तस्दीक हुसैन ने कहा कि सऊदी अरब अपने आका इसराईल व अमेरिका के इशारों पर जुल्म कर रहा है। मौलाना ने बताया कि शेख निम्र को पहली बार साल 2006 में सऊदी सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया था। उन्हे बहरैन में एक कुरान के प्रोग्राम में भाग लेने के बाद वापसी के समय हिरासत में ले लिया गया था। उन पर आरोप था कि इस प्रोग्राम में उन्होने जन्नतुल बकी (वह कब्रिस्तान जहां मोहम्मद साहब की बेटी व नवासों की कब्रे हैं) को दुरुस्त करने और सऊदी अरब में शिया समुदाय को भागीदारी दिये जाने की मांग की थी। जुल्म का आलम यह है कि सऊदी अरब में कोई भी शिया मुस्लिम सांसद नही हो सकता है और शियों को मस्जिद बनाने की इजाजत नही है। जबकि गिरजाघर, गुरुद्वारा, मन्दिर आदि मौजूद हैं। शियों को नमाजे जुमा की इजाजत नही हैं। मौलाना ने कहा जिन बच्चों का नाम अबूतालिब, अली, फातिमा, हसन एवं हुसैन होता है उन्हे स्कूलों में दाखिला नही दिया जाता है। उन्होने कहा आयतुल्लाह अल निम्र की मांगो को लेकर सऊदी हुकूमत ने उन्हे फांसी की सजा दी क्या यह आतंकवाद की रैंक में नही आता है। इस प्रोग्राम के बाद गुलाम अस्करी हाल से शाम 4 बजे मौलाना सैय्यद तस्दीक हुसैन, इमामे जुमा, मौलाना सैय्यद मोहम्मद रजा, मौलाना सैय्यद अता मेंहदी एवं मौलाना सैय्यद इब्ने अब्बास के सरपरस्ती में सऊदी अरब, अमेरिका, इसराईल सरकार के खिलाफ जुलूस निकाला गया। जो आनन्द भवन स्कूल, पुलिस लाइन चौराहा, बस स्टाप होते हुये लखनऊ रोड के पास पटेल तिराहे पर पहुंचा जहां पर जुलूस में मौजूद सैकड़ो लोगों ने पुतला फूंक कर अपना गुस्सा इजहार किया। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गयी। आखिर में मौलाना मोहम्मद रजा ने पुलिस महकमा का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।
बाराबंकी। सऊदी अरब के मशहूर शिया धर्म गुरु शेख बाकर अल निम्र समेत उनके भाई व भतीजे को सऊदी अरब ने दो जनवरी 2016 को बेगुनाह फंासी की सजा देकर शहीद कर दिया। वह सऊदी अरब की एक जानी-मानी हस्ती थे। जो काफी वर्षो से सऊदी अरब में मनावाधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। सऊदी अरब के इस शर्मनाक कार्य के चलते आज दुनिया भर में शेख निम्र की हिमायत में एहतेजाजी जलसा किया गया। मौलाना गुलाम अस्करी हाल में मौलाना सै. तस्दीक हुसैन रिजवी की सदारत में एहतेजाजी जलसा आगाज हुआ। जिसमें सैकड़ो लोगों ने शिरकत की। इमामे जुमा मौलाना सै. मोहम्मद रजा ने खिताब करते हुये कहा कि सऊदी तानाशाह ने मजलूम धर्मगुरु को शहीद करके अपनी इंतेहाई दरिंदगी का परिचय दिया है। जिनका जवाब उन्हे एक दिन देना होगा। शेख निम्र को गिरफ्तार हुये तीन साल से अधिक समय हो रहा है और उन्हे सजाये मौत देना खुला अन्याय है। उन्होने कहा कि सऊदी हुकूमत यह न समझे कि शेख निम्र को फांसी देकर हक की आवाज को दबा देगी। शेख निम्र की शहादत सऊदी जालिम हुकूमत की ताबूत की आखिरी कील साबित होगी। मौलाना इब्ने अब्बास ने कहा पूरी दुनिया में आतंकवाद फैलाने के लिये डालर मद्द देने वाला यही सऊदी अरब है और अमेरिका व इसराईल हैं। सऊदी हुकूमत का इस्लाम से कोई लेना देना नही है।
वह केवल इस्लाम के नाम का नकाब पहने हुये हैं। अगर यह मुसलमान होते तो फिलिस्तीन, यमन, बहरैन, ईराक व सीरिया में हो रहे जुल्म के खिलाफ भी बोलते। उसके उलट ये आईएस-आईएस जैसे आतंकी संगठनो का साथ देता है। मौलाना अता मेंहदी ने खिताब करते हुये कहा इमाम हुसैन (अ.स.) के रास्ते पर चलकर सिर तो कटा सकते हैं लेकिन सिर झुका नही सकते हैं। शेख बाकर निम्र ने अपनी शहादत देकर यह साबित कर दिया। मौलाना तस्दीक हुसैन ने कहा कि सऊदी अरब अपने आका इसराईल व अमेरिका के इशारों पर जुल्म कर रहा है। मौलाना ने बताया कि शेख निम्र को पहली बार साल 2006 में सऊदी सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया था। उन्हे बहरैन में एक कुरान के प्रोग्राम में भाग लेने के बाद वापसी के समय हिरासत में ले लिया गया था। उन पर आरोप था कि इस प्रोग्राम में उन्होने जन्नतुल बकी (वह कब्रिस्तान जहां मोहम्मद साहब की बेटी व नवासों की कब्रे हैं) को दुरुस्त करने और सऊदी अरब में शिया समुदाय को भागीदारी दिये जाने की मांग की थी। जुल्म का आलम यह है कि सऊदी अरब में कोई भी शिया मुस्लिम सांसद नही हो सकता है और शियों को मस्जिद बनाने की इजाजत नही है। जबकि गिरजाघर, गुरुद्वारा, मन्दिर आदि मौजूद हैं। शियों को नमाजे जुमा की इजाजत नही हैं। मौलाना ने कहा जिन बच्चों का नाम अबूतालिब, अली, फातिमा, हसन एवं हुसैन होता है उन्हे स्कूलों में दाखिला नही दिया जाता है। उन्होने कहा आयतुल्लाह अल निम्र की मांगो को लेकर सऊदी हुकूमत ने उन्हे फांसी की सजा दी क्या यह आतंकवाद की रैंक में नही आता है। इस प्रोग्राम के बाद गुलाम अस्करी हाल से शाम 4 बजे मौलाना सैय्यद तस्दीक हुसैन, इमामे जुमा, मौलाना सैय्यद मोहम्मद रजा, मौलाना सैय्यद अता मेंहदी एवं मौलाना सैय्यद इब्ने अब्बास के सरपरस्ती में सऊदी अरब, अमेरिका, इसराईल सरकार के खिलाफ जुलूस निकाला गया। जो आनन्द भवन स्कूल, पुलिस लाइन चौराहा, बस स्टाप होते हुये लखनऊ रोड के पास पटेल तिराहे पर पहुंचा जहां पर जुलूस में मौजूद सैकड़ो लोगों ने पुतला फूंक कर अपना गुस्सा इजहार किया। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गयी। आखिर में मौलाना मोहम्मद रजा ने पुलिस महकमा का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।
