नेक किरदार से मिलती है इज्ज़त : मौलाना कल्बे जवाद
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अजमी रिज़वी
जैदपुर (बाराबंकी) इज्जत की चाहत एक नेचुरल चीज है। हर इन्सान चाहता है कि उसे इज्जत मिले। इसके लिए कभी इंसान सत्ता को जरीआ समझता है कभी दौलत को समझता है। यह बातें कस्बे के इमामबाड़ा सरकारे हुसैनी में मास्टर इरषाद मेहदी की आहिल्या के चालीसवें की मजलिस को खिताब करते हुए षिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने कही।
उन्होने आगे कहा कि जब इंसान सत्ता को इज्जत का जरीआ समझता है तो उसे हासिल करने की कोषिष करता है लेकिन सत्ता और दौलत के जरिये मिलने वाली इज्जत उनके खत्म होने से खत्म हो जाती है लेकिन जिन्दगी में संयम बरतने कैरेक्टर और किरदार की बेहतरी के साथ इमानदारी के अपनाने पर जो इज्जत मिलती है वह हमेषा बाकी रहती है। आखिर में कर्बला के मसायब बयान किये। इससे पहले मजलिस की शुरुआत तिलावते र्कुआन से हुई इसके बाद मुसव्विर जैदपूरी ने हदीसे किसा पढ़ी। इसके बाद डाॅ0 मुहिब मौरावी, मिनहाल आजमी, व डाॅ0 रजा मौरावी ने अपने कलाम पेष कर नजरानये अकीदत पेष की। मजलिस में बड़ी तादाद में लोग मौजूद थे।
जैदपुर (बाराबंकी) इज्जत की चाहत एक नेचुरल चीज है। हर इन्सान चाहता है कि उसे इज्जत मिले। इसके लिए कभी इंसान सत्ता को जरीआ समझता है कभी दौलत को समझता है। यह बातें कस्बे के इमामबाड़ा सरकारे हुसैनी में मास्टर इरषाद मेहदी की आहिल्या के चालीसवें की मजलिस को खिताब करते हुए षिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने कही।
उन्होने आगे कहा कि जब इंसान सत्ता को इज्जत का जरीआ समझता है तो उसे हासिल करने की कोषिष करता है लेकिन सत्ता और दौलत के जरिये मिलने वाली इज्जत उनके खत्म होने से खत्म हो जाती है लेकिन जिन्दगी में संयम बरतने कैरेक्टर और किरदार की बेहतरी के साथ इमानदारी के अपनाने पर जो इज्जत मिलती है वह हमेषा बाकी रहती है। आखिर में कर्बला के मसायब बयान किये। इससे पहले मजलिस की शुरुआत तिलावते र्कुआन से हुई इसके बाद मुसव्विर जैदपूरी ने हदीसे किसा पढ़ी। इसके बाद डाॅ0 मुहिब मौरावी, मिनहाल आजमी, व डाॅ0 रजा मौरावी ने अपने कलाम पेष कर नजरानये अकीदत पेष की। मजलिस में बड़ी तादाद में लोग मौजूद थे।


