त्रिकोणीय मुकाबले में दिलचस्प होगा MLC का चुनाव
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अजमी रिज़वी / आसिफ हुसैन
बाराबंकी। विधान परिषद का चुनाव नजदीक आते-आते चुनावी रंग दिखना शुरु हो गया है। सपा से घोषित प्रत्याशी राजेश यादव ‘‘राजू‘‘ को पूर्व केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का समर्थन मिलने के बाद एक तरफा जीत मानी जा रही है। लेकिन नामांकन वापसी की प्रतिक्षा कर रहे सपा प्रत्याशी को झटका तब लगा जब बसपा और भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने मैदान में डटे रह कर प्रबल दावेदारी पेश की। जिसके बाद से सपाई खेमे में गुणा-भाग का सिलसिला शुरु हो गया। चुनाव दिलचस्प होता तब दिखाई दिया जब भाजपा द्वारा पार्टी की ओर से प्रत्याशी की घोषणा न किये जाने के बावजूद भाकियू नेता मुकेश सिंह को अपना समर्थन देते हुये भाजपा समर्थित प्रत्याशी की घोषणा की। जो इस चुनावी रंग को और रंगीन करने का माध्यम बना। एमएलसी के इस चुनाव में मैदान में उतरे तीनों दिग्गजों का अपना-अपना जनाधार है। ऐसे में कौन एमएलसी चुना जायेगा। यह अभी भविष्य के गर्भ में है।
बताते चलें कि सपा से घोषित उम्मीदवार राजेश यादव ‘‘राजू‘‘ को पहले भी नवाबगंज से विधानसभा का टिकट मिल चुका था। लेकिन सुरेश यादव के आते ही उन्हे निराशा का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बदांयू सांसद धर्मेन्द्र यादव से बढ़ी नजदीकियों के चलते एक बार फिर उन्हे एमएलसी पद का उम्मीदवार बनाया गया। उम्मीदवार बनते ही एमएलसी पद के लिये सपा के अन्य संभावित प्रत्याशियों ने राजेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिसमे पूर्व में पद के दावेदार रहे रामसेवक यादव के परिजनों ने खासी नाराजगी जाहिर की। लेकिन उनकी नाराजगी भी राजेश यादव के हौसले को नही डिगा सकी। ऐसे में पार्टी की एकजुटता और हाईकमान के निर्देशों पर राजेश को ही सपा से एमएलसी पद का अन्तिम उम्मीदवार माना गया।
राजेश की प्रबल दावेदारी के बाद बसपा के मनोज कुमार वर्मा ने एमएलसी का उम्मीदवारी पेश की। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी से अपना नाम वापस लेने के बाद पार्टी हाइकमान की नाराजगी के चलते एमएलसी के चुनाव में बसपा ने मजबूत दावेदारी साबित करते हुए अपना प्रतयासी घोषित किया। दलित वोटरों के जनाधार के साथ ही स्वजातीय जनाधर के आधार पर मनोज वर्मा भी मजबूत उम्मीदवार माने जा रहे है। ऐसे में किसानों के लिये संघर्ष की लड़ाई लड़ने वाले भाकियू के प्रांतीय महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य मुकेश सिंह ने भी एमएलसी के लिए मैदान में उतरे। मुकेश के मैदान में आते ही सत्तारुढ़ दल और अन्य दलों में खलबली मच गयी है। इससे पहले भी मुकेश एमएलसी पद की दावेदारी कर चुके है। इस बार भी उन्हे इस पद के लिये प्रबल दावेदार माना जा रहा है। इसका कारण है किसानों के बीच रहकर उनकी समस्याओं और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुये संघर्ष करना। गुरुवार को नाम वापसी के दिन किसी भी उम्मीदवार द्वारा मैदान न छोड़े जाने पर सपा खेमे में खलबली मच गयी।
जानकारी में आया है कि सपा के वरिष्ठ नेता जनपद की एमएलसी सीट को सपा का मानकर नाम वापसी की तारीख का इंतजार कर रहे थे। क्योंकि नाम वापसी के बाद सपा इस सीट को जिला पंचायत की तरह ही र्निविरोध जीतना चाहती थी। लेकिन उनकी यह सोच कामयाब नही हो सकी। ऐसे में शुक्रवार को जब भाजपा द्वारा भाकियू नेता मुकेश सिंह को समर्थन देने की बात सामने आयी तब सपा और बसपा खेमे में हड़कम्प मच गया। मुकेश का भाजपा से जुड़ना कहीं न कहीं सोची समझी राजनीति का परिणाम है। क्योंकि एक बड़े जनाधार को तोड़कर अपनी ओर करना और एमएलसी पद के लिये बड़ी दावेदारी करना साबित कर रहा है। ऐसे में एमएलसी पद पर दावेदारी कर रहे सपा बसपा और भाजपा के उम्मीदवारों का यह त्रिकोणीय मुकाबला होगा। जिसमें तीनों की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। अब देखना है कि मतदाता का रुझान किस ओर जाता है। ऐसे में तीनों दलों के प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने और अपनी ओर आकर्षित करने में कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
बाराबंकी। विधान परिषद का चुनाव नजदीक आते-आते चुनावी रंग दिखना शुरु हो गया है। सपा से घोषित प्रत्याशी राजेश यादव ‘‘राजू‘‘ को पूर्व केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का समर्थन मिलने के बाद एक तरफा जीत मानी जा रही है। लेकिन नामांकन वापसी की प्रतिक्षा कर रहे सपा प्रत्याशी को झटका तब लगा जब बसपा और भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने मैदान में डटे रह कर प्रबल दावेदारी पेश की। जिसके बाद से सपाई खेमे में गुणा-भाग का सिलसिला शुरु हो गया। चुनाव दिलचस्प होता तब दिखाई दिया जब भाजपा द्वारा पार्टी की ओर से प्रत्याशी की घोषणा न किये जाने के बावजूद भाकियू नेता मुकेश सिंह को अपना समर्थन देते हुये भाजपा समर्थित प्रत्याशी की घोषणा की। जो इस चुनावी रंग को और रंगीन करने का माध्यम बना। एमएलसी के इस चुनाव में मैदान में उतरे तीनों दिग्गजों का अपना-अपना जनाधार है। ऐसे में कौन एमएलसी चुना जायेगा। यह अभी भविष्य के गर्भ में है।
बताते चलें कि सपा से घोषित उम्मीदवार राजेश यादव ‘‘राजू‘‘ को पहले भी नवाबगंज से विधानसभा का टिकट मिल चुका था। लेकिन सुरेश यादव के आते ही उन्हे निराशा का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बदांयू सांसद धर्मेन्द्र यादव से बढ़ी नजदीकियों के चलते एक बार फिर उन्हे एमएलसी पद का उम्मीदवार बनाया गया। उम्मीदवार बनते ही एमएलसी पद के लिये सपा के अन्य संभावित प्रत्याशियों ने राजेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिसमे पूर्व में पद के दावेदार रहे रामसेवक यादव के परिजनों ने खासी नाराजगी जाहिर की। लेकिन उनकी नाराजगी भी राजेश यादव के हौसले को नही डिगा सकी। ऐसे में पार्टी की एकजुटता और हाईकमान के निर्देशों पर राजेश को ही सपा से एमएलसी पद का अन्तिम उम्मीदवार माना गया।
राजेश की प्रबल दावेदारी के बाद बसपा के मनोज कुमार वर्मा ने एमएलसी का उम्मीदवारी पेश की। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी से अपना नाम वापस लेने के बाद पार्टी हाइकमान की नाराजगी के चलते एमएलसी के चुनाव में बसपा ने मजबूत दावेदारी साबित करते हुए अपना प्रतयासी घोषित किया। दलित वोटरों के जनाधार के साथ ही स्वजातीय जनाधर के आधार पर मनोज वर्मा भी मजबूत उम्मीदवार माने जा रहे है। ऐसे में किसानों के लिये संघर्ष की लड़ाई लड़ने वाले भाकियू के प्रांतीय महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य मुकेश सिंह ने भी एमएलसी के लिए मैदान में उतरे। मुकेश के मैदान में आते ही सत्तारुढ़ दल और अन्य दलों में खलबली मच गयी है। इससे पहले भी मुकेश एमएलसी पद की दावेदारी कर चुके है। इस बार भी उन्हे इस पद के लिये प्रबल दावेदार माना जा रहा है। इसका कारण है किसानों के बीच रहकर उनकी समस्याओं और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुये संघर्ष करना। गुरुवार को नाम वापसी के दिन किसी भी उम्मीदवार द्वारा मैदान न छोड़े जाने पर सपा खेमे में खलबली मच गयी।
जानकारी में आया है कि सपा के वरिष्ठ नेता जनपद की एमएलसी सीट को सपा का मानकर नाम वापसी की तारीख का इंतजार कर रहे थे। क्योंकि नाम वापसी के बाद सपा इस सीट को जिला पंचायत की तरह ही र्निविरोध जीतना चाहती थी। लेकिन उनकी यह सोच कामयाब नही हो सकी। ऐसे में शुक्रवार को जब भाजपा द्वारा भाकियू नेता मुकेश सिंह को समर्थन देने की बात सामने आयी तब सपा और बसपा खेमे में हड़कम्प मच गया। मुकेश का भाजपा से जुड़ना कहीं न कहीं सोची समझी राजनीति का परिणाम है। क्योंकि एक बड़े जनाधार को तोड़कर अपनी ओर करना और एमएलसी पद के लिये बड़ी दावेदारी करना साबित कर रहा है। ऐसे में एमएलसी पद पर दावेदारी कर रहे सपा बसपा और भाजपा के उम्मीदवारों का यह त्रिकोणीय मुकाबला होगा। जिसमें तीनों की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। अब देखना है कि मतदाता का रुझान किस ओर जाता है। ऐसे में तीनों दलों के प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने और अपनी ओर आकर्षित करने में कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

