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दबंगों ने रोकी दलितों की बारात, पुलिस भी हो गई मौन

फिरोजाबाद। आजादी के 69 साल बीत जाने के बाद भी क्या हिंदुस्तान में आज भी दलित आजाद नहीं है। ऐसा ही कुछ नजारा फिरोजाबाद में देखने को मिला जब दलित समाज की बारात को दबंगों ने गावं में चढ़ने नहीं दिया जबकि इस बात की खबर पहले से ही प्रशासन को थी। हैरान करने वाली बात यह है कि वहां मौजूद पुलिस बल भी दबंगो के सामने बौना नज़र आया।
यह घटना फिरोजाबाद के थाना नारखी के रजावली गांव की है। जाति से बाल्मिक जगदीश की दो बेटियों नीलम और नीरज की सोमवार को हाथरस के रिसकमा गावं से बारात आई। दरअसल जगदीश को शक था की दबंगों के गावं में  बारात धूम धाम से घर तक नहीं पहुंच पाएगी इसलिए जगदीश ने पहले ही एसडीएम टूण्डला को एक प्रार्थना पत्र देकर हालत से वाकिफ करा दिया था जिसके मद्देनज़र मौके पर पुलिस बल और नायब तहसीलदार को तैनात दिया गया था।
बाबजूद इसके दूल्हा रिकू और राहुल घोड़ी पर न चढ़ सके। गावं में दबंगों का खौफ इतना था कि पुलिस भी जगदीश की मदद करने में नाकाम साबित हुई और वही हुआ जो दबंग चाहते थे। बारात बिना बेंड बाजे के शांति से चुप चाप लड़की के घर पहुंची।
जगदीश (वधु का पिता) ने इल पूरे मामले पर कहा कि हम बाल्मिकी हैं और ये दबंग हैं। गावं के हमारी बारात से ये ऐतराज मानते है। यही नहीं उन्होने कहा कि लड़का हँसकर और घोड़ा पे बैठे तो भी ये ऐतराज मानते है और आज हमारी बारात नहीं चढ़ी तो अब कभी नहीं चढ़ेगी।
हालांकि इस पूरे मुद्दे पर अब सवाल उठता है कि  जब पुलिस और प्रशासन को पहले से ही लड़की के पिता ने गांव के दबंगों के इरादों को बता दिया था तो फिर आखिर बारात बैंड बाजे के साथ क्यों नहीं चढ़ सकी। तहसीलदार के अनुसार बारात को बड़ी सुरक्षा के साथ लड़की के दरवाजे तक पहुंचाया गया। मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने कहा कि प्रर्थना पत्र आया था की बाल्मिक समाज की बारात आनी थी और इसको रोका जा रहा था। उसी संबंध में आए हैं ताकि व्यवस्था बनी रहे जो मौलिक अधिकार है उसे बरकरार रखे।

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