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इस्लाम जिन्दा रखने आया है मारने के लिए नहीं आया : डा कल्बे सादिक

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। देवां रोड स्थित गुलाम अस्करी हाल में आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डा कल्बे सादिक ने कहा इस्लाम जिन्दा रखने आया है मारने के लिए नहीं आया। वह हाजी नजर हसनैन की याद में मजलिस को खिताब करने आये थे।
मौलाना सादिक ने आगे कहा कि र्कुआन मजीद हमारी हिदायत के लिए नाजिल होने वाली किताब है। र्कुआन के बारे में जो शुबहा करे वो इस्लाम से निकल गया। जब दुनिया में किसी बात पर कन्फ्यूजन हो जाये तो र्कुआन के दर पर आये तो र्कुआन कहे उसे माने। इन्सान की पूरी बाडी टेपरिकार्डर है जो आप अच्छे खराब काम कर रहे है वह सब टेप हो रहा है। कयामत में हाथ, पैर, आंख, कान सब बोलेंगे।
मौलाना डा कल्बे सादिक ने आगे कहा कि मैंने हिन्दू धर्म को पढ़ा, मैंने क्रिश्चियन को भी पढ़ा हम हिन्दुस्तान में रहते हैं भारत की अक्सरियत हिन्दू है यह बहुत अच्छे हैं। अब तालिबान, दाइश, अलकायदा अपने को मुसलमान कहते हैं लेकिन यह मुसलमान नहीं न ही इस्लाम इनका जिम्मेदार है। र्कुआन की बातों से जो मेच करे वो ही इस्लाम है। उन्होंने कहा कि गीता जी को पढ़ा है, गीता जी की बहुत सी ऐसी बाते है जो उर्दू अरबी में तर्जुमा करू तो आप कहेंगे र्कुआन पढ़ रहा हूं। अक्ल मुसलमानों के पास नहीं रह गयी है। इस्लाम अक्ल को फालो करता है अक्ल इस्लाम को फालो नहीं करती, हिन्दू धर्म प्यारा धम्र है। स्वामी विवेकानंद ने कहा पूजा पाठ करने वाला धार्मिक नहीं धार्मिक इन्सान वह है जो दूसरों के लिए जिन्दा रहे। जिससे दूसरे को लाभ हो वही धार्मि है इस्लाम ने यह बात कही कि खुर्दगर्ज इन्सान, सेल्फिश इन्सान धार्मिक नहीं हो जो अल्लाह की खिलकत को फायदा पहुंचाये वही मुसलमान है।
मौलाना डाक्टर कल्बे सादिक साहब ने कहा कि वक्फ की जमीन को अमानत समझकर बचाने वाले मुतवल्ली जिन्दा है और खाने वाले मुर्दा है। इस्लाम क्वालिटी का मजहब है यह मुश्किले हर करने आया है, मुश्किले पैदा करने नहीं आया है।
अन्त में मसायब पढ़ते हुए शहीदाने कर्बला का तजकिरा किया। मजलिस से पूर्व शोआराए कराम ने नजरानये अकीदत पेश किया। अन्त में खानवदाये मरहूम नजर हसनैन ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

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