पुलिस ने नही दर्ज की एफआईआर, मुख्यमंत्री से गुहार
https://husainijnp.blogspot.com/2016/06/blog-post_636.html
हैदरगढ़, बाराबंकी। अपने पुत्र की तलाश में चार माह से पिता दर-दर की
ठोकरें खा रहा है। पुलिस ने गुमशुदी की रिपोर्ट दर्ज कर नामजद आरोपियों
के खिलाफ रिपोर्ट नहीं लिख रही है। पीड़ित पिता न्याय के लिए डीएम से लेकर
पुलिस कप्तान से मिलकर आप बीती बताने के बाद भी पुलिस रिपोर्ट लिखने को
तैयार नहीं है। क्षेत्र के फुलचौरा मजरे सालपुर निवासी मायाराम के
मुताबिक उनका पुत्र पिन्टू 15 वर्ष बीते 11 मार्च 2016 की शाम घर से
निकला तो फिर नहीं लौटा तमाम खोजबीन के बाद पता नहीं चला तो कोतवाली
पुलिस ने गुमशुदी की रिपेार्ट पीड़ित की तहरीर पर लिखकर अपने कर्तव्य से
इतिश्री कर ली। जबकि पिता मायाराम ने 16 मार्च को गांव के ही शीतल व
किरसन के खिलाफ जानबूझकर गायब करने आदि का आरोप लगाकर तहरीर दी। लेकिन
राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की। पीड़ित ने इसकी
शिकायत लेकर जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान से मिलकर स्थानीय पुलिस द्वारा
रिपोर्ट न दर्ज करने व नामजद आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। इसके
बावजूद भी पुलिस ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की, जिससे आहत पीड़ित पिता
मायाराम ने अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंचने का निर्णय
लिया है, भले ही सरकार तत्काल शिकायतों पर अमल करने के आदेश जारी करती
हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न्याय मिलना कितना कठिन है यह किसी पीड़ित
गरीब से पूंछा जाय तो सच्चाई सामने स्वयं आ जायेगी।
ठोकरें खा रहा है। पुलिस ने गुमशुदी की रिपोर्ट दर्ज कर नामजद आरोपियों
के खिलाफ रिपोर्ट नहीं लिख रही है। पीड़ित पिता न्याय के लिए डीएम से लेकर
पुलिस कप्तान से मिलकर आप बीती बताने के बाद भी पुलिस रिपोर्ट लिखने को
तैयार नहीं है। क्षेत्र के फुलचौरा मजरे सालपुर निवासी मायाराम के
मुताबिक उनका पुत्र पिन्टू 15 वर्ष बीते 11 मार्च 2016 की शाम घर से
निकला तो फिर नहीं लौटा तमाम खोजबीन के बाद पता नहीं चला तो कोतवाली
पुलिस ने गुमशुदी की रिपेार्ट पीड़ित की तहरीर पर लिखकर अपने कर्तव्य से
इतिश्री कर ली। जबकि पिता मायाराम ने 16 मार्च को गांव के ही शीतल व
किरसन के खिलाफ जानबूझकर गायब करने आदि का आरोप लगाकर तहरीर दी। लेकिन
राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की। पीड़ित ने इसकी
शिकायत लेकर जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान से मिलकर स्थानीय पुलिस द्वारा
रिपोर्ट न दर्ज करने व नामजद आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। इसके
बावजूद भी पुलिस ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की, जिससे आहत पीड़ित पिता
मायाराम ने अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंचने का निर्णय
लिया है, भले ही सरकार तत्काल शिकायतों पर अमल करने के आदेश जारी करती
हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न्याय मिलना कितना कठिन है यह किसी पीड़ित
गरीब से पूंछा जाय तो सच्चाई सामने स्वयं आ जायेगी।

