जुनेद की पत्नी को मिली ढाढस , 32 घंटे की मेहनत का मिला सिला, मिली लाश
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/32_27.html
असगर नकी/मेहनाज़ अहमद
सुल्तानपुर । 32 घंटे लग गये जुनेद अहमद की लाश ढूँढ़ निकालने में, लेकिन पति जुनेद की मौत की ख़बर के बाद इतना लम्बा समय सबीना बानों ने पहले दिन काटा भी तो "दुःख, दर्द, और आँसूओं के साथ"! ज़बान पर पति को खोदेने और लाश को ढूँढ़ निकालने की फरियाद तो दिल में सवाल ये घर अब किसके सहारे चलेगा? हां इस मामले में एसडीएम दिनेश गुप्ता और सपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी शकील अहमद की मेहनतो-मशक्कत काबिले तारीफ है।
गौरतलब रहे कि कल मंगलवार को सबीना बानों का परिवार पल भर में बिखर गया था जब घर के इकलौते सहारा रहे सबीना के पति जुनेद को पिकौरा नरहरपुर के पास मौजूद नहर पर जुनेद को मौत ने अपनी आगोश में ले लिया था, सबीना के लिये पति की मौत की ख़बर सुनना "आसमान फटने" के बराबर थी उस पर से पति जुनेद की लाश तक़रीबन 32 घंटों तक न मिलने की ख़बर तो सबीना को अंदर ही अंदर तोड़ गई, उधर जुनेद की बहन अंजुम मां-बाप के बिछड़ जाने के बाद भाई को खो देने की ख़बर सुन सकते में आ गई थी, लेकिन किस्मत के लिखे को टाल कौन सकता है?
मंगलवार का दिन सबीना बानों के लिये काला दिन बनकर आया,
जुनेद अहमद ने अपने पीछे वंश के रूप में तीन जिंदगियां छोड़ी हैं जिनमें से सोह्बान 12 और सुबहान 10 तो इतनी समझ रखते हैं कि उन्हें समझा दिया गया की "अब्बू" अब दुनिया में नहीं रहे इन बच्चों को ख़बर पर धक्का भी लगा लेकिन 6 साल के मासूम सामून को कैसे तसल्ली दी जाये कि अब्बू अब दुनिया में नहीं रहे, वहीं 32 घंटों में हर घंटे पर मोहल्लेवासियों में एक ही बात पर चर्चा पता नहीं लाश किधर और कहां लापता हो गई? जबकि मंगलवार को देर शाम तक एसडीएम श्री गुप्ता की निगरानी में लगी 40 गोताखोरों ने लाश को ढूँढ़ निकालने का भर्सक प्रयास किया लेकिन दिन के उजाले से शुरू प्रयास रात के अंधेरे में मायूसी के साथ बंद हो गया था।
बुधवार को सुबह उजाले में लाशा ढूँढ़ निकालने का अभियान जो शुरु हुआ तो वो तक़रीबन ढाई बजे इस कामयाबी के साथ बंद हुआ के जब घटना स्थल से क़रीब 6 किलोमीटर की दूरी पर गोताखोरो के हाथ जुनेद की लाश लग गई और "फिर ग़मगीन माहौल में भी हर चेहरे पर मुस्कान की एक हल्की सी लकीर दिखाई दी", मौके पर मौजूद एसडीएम दिनेश गुप्ता, तहसीलदार महात्मा सिंह, सपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी शकील अहमद, कांग्रेस के पूर्व चेयरमैन प्रत्याशी कामरान ज़फर, इसौली विधायक अबरार अहमद, कौमी एकता दल के नेता अर्श खानआदि की मौजूदगी में लाश पोस्टमार्टम के लिये भेजी गई।
सुल्तानपुर । 32 घंटे लग गये जुनेद अहमद की लाश ढूँढ़ निकालने में, लेकिन पति जुनेद की मौत की ख़बर के बाद इतना लम्बा समय सबीना बानों ने पहले दिन काटा भी तो "दुःख, दर्द, और आँसूओं के साथ"! ज़बान पर पति को खोदेने और लाश को ढूँढ़ निकालने की फरियाद तो दिल में सवाल ये घर अब किसके सहारे चलेगा? हां इस मामले में एसडीएम दिनेश गुप्ता और सपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी शकील अहमद की मेहनतो-मशक्कत काबिले तारीफ है।
गौरतलब रहे कि कल मंगलवार को सबीना बानों का परिवार पल भर में बिखर गया था जब घर के इकलौते सहारा रहे सबीना के पति जुनेद को पिकौरा नरहरपुर के पास मौजूद नहर पर जुनेद को मौत ने अपनी आगोश में ले लिया था, सबीना के लिये पति की मौत की ख़बर सुनना "आसमान फटने" के बराबर थी उस पर से पति जुनेद की लाश तक़रीबन 32 घंटों तक न मिलने की ख़बर तो सबीना को अंदर ही अंदर तोड़ गई, उधर जुनेद की बहन अंजुम मां-बाप के बिछड़ जाने के बाद भाई को खो देने की ख़बर सुन सकते में आ गई थी, लेकिन किस्मत के लिखे को टाल कौन सकता है?
मंगलवार का दिन सबीना बानों के लिये काला दिन बनकर आया,
जुनेद अहमद ने अपने पीछे वंश के रूप में तीन जिंदगियां छोड़ी हैं जिनमें से सोह्बान 12 और सुबहान 10 तो इतनी समझ रखते हैं कि उन्हें समझा दिया गया की "अब्बू" अब दुनिया में नहीं रहे इन बच्चों को ख़बर पर धक्का भी लगा लेकिन 6 साल के मासूम सामून को कैसे तसल्ली दी जाये कि अब्बू अब दुनिया में नहीं रहे, वहीं 32 घंटों में हर घंटे पर मोहल्लेवासियों में एक ही बात पर चर्चा पता नहीं लाश किधर और कहां लापता हो गई? जबकि मंगलवार को देर शाम तक एसडीएम श्री गुप्ता की निगरानी में लगी 40 गोताखोरों ने लाश को ढूँढ़ निकालने का भर्सक प्रयास किया लेकिन दिन के उजाले से शुरू प्रयास रात के अंधेरे में मायूसी के साथ बंद हो गया था।
बुधवार को सुबह उजाले में लाशा ढूँढ़ निकालने का अभियान जो शुरु हुआ तो वो तक़रीबन ढाई बजे इस कामयाबी के साथ बंद हुआ के जब घटना स्थल से क़रीब 6 किलोमीटर की दूरी पर गोताखोरो के हाथ जुनेद की लाश लग गई और "फिर ग़मगीन माहौल में भी हर चेहरे पर मुस्कान की एक हल्की सी लकीर दिखाई दी", मौके पर मौजूद एसडीएम दिनेश गुप्ता, तहसीलदार महात्मा सिंह, सपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी शकील अहमद, कांग्रेस के पूर्व चेयरमैन प्रत्याशी कामरान ज़फर, इसौली विधायक अबरार अहमद, कौमी एकता दल के नेता अर्श खानआदि की मौजूदगी में लाश पोस्टमार्टम के लिये भेजी गई।
जुनेद के परिवार को मिलेगा 30 हज़ार रूपए: एसडीएम
एसडीएम दिनेश गुप्ता ने मोबाइल पर जानकारी दी कि जुनेद का परिवार बहुत गरीब है लिहाज़ा राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 की प्रशासनिक मदद पत्नी को दी जायेगी, इसके अलावा अगर सबीना बानों के पास ज़मीन होगी जिसकी जांच की जा रही है तो 5 लाख की मदद दी जायेगी, और शासनिक तौर पर दी जाने वाली मदद में गरीब परिवार के लिये मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मदद की जाती है अगर प्रार्थना पत्र प्रेषित किया जायेगा तो वहां से भी लाभ मिल सकता है।

