इबादत वो हर अमल है जो कुरबतन इलल्लाह हो: मौलाना इब्ने
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/blog-post_17.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। तख़लीके बशर इबादते परवरदिगार है। यानी अल्लाह ने इंसान को
अपनी इबादत के लिए पैदा किया। यह बात मौलाना इब्ने अब्बास ने मरहूम मो.
बाकर के चालीसवें की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गुलाम अस्करी हाल
में कही। मौलाना ने आगे कहा अल्लाह ने दुनिया के हर शै इंसान के लिए
बनाई, मगर इंसान को अपने लिए बनाया। इबादत वो हर अमल है जो कुरबतन
इलल्लाह हो। मजलिस के अन्त मे शहीदाने कर्बला के मसायब बयान किये जिसे
सुुनकर मोमनीन रोने लगे। मजलिस से पूर्व फै़ज़ान महमूदाबादी ने अपना
बेहतरीन कलाम पेश किया- अपने पराये सब को गले से लगा गयें, इंसानियत के
पाठ को बाकर पढ़ा गये, हुस्ने सुलूक, नेक तबीयत वफ़ा सेयार, औसाफ अपनी ज़ात
मे सब दिखागये। इसके अलावा सलाम मे पढ़ा- काश मुसलमां ये तो समझते, ज़ाते
अली लासानी क्यों है, नहजे बलाग़ा पढ़ के बताओं, हर जुमला कुरआनी क्यों है।
कशिश संडीलवी ने पढ़ा- हंसते हुए अजल केा गले से लगा लिया, बेशक गुलामे
आबिदे बीमार थे बाकर। मौलाना रज़ा जैदपुरी ने पढ़ा- हैं अलम और मसकीजे़ का
रिस्ता इस तरह, एक मंसब की अलामत, एक हया अब्बास की। समर कानपुरी ने पढ़ा-
हैदर की मुहब्बत मे मरने का मज़ा और बहता है लहूदार से करता है सना और, जब
उल्फ़ते हैदर ने ज़बां कट गई आमिर, तब दार पे मीशम ने किया शुक्रे खुदा और
इसके अलावा कामयाब, मोहम्मद, मोनिस सरवर, मो. जैन अब्बास ने भी नजरानये
अकीदत पेश किया। पिसराने बाकर ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
बाराबंकी। तख़लीके बशर इबादते परवरदिगार है। यानी अल्लाह ने इंसान को
अपनी इबादत के लिए पैदा किया। यह बात मौलाना इब्ने अब्बास ने मरहूम मो.
बाकर के चालीसवें की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गुलाम अस्करी हाल
में कही। मौलाना ने आगे कहा अल्लाह ने दुनिया के हर शै इंसान के लिए
बनाई, मगर इंसान को अपने लिए बनाया। इबादत वो हर अमल है जो कुरबतन
इलल्लाह हो। मजलिस के अन्त मे शहीदाने कर्बला के मसायब बयान किये जिसे
सुुनकर मोमनीन रोने लगे। मजलिस से पूर्व फै़ज़ान महमूदाबादी ने अपना
बेहतरीन कलाम पेश किया- अपने पराये सब को गले से लगा गयें, इंसानियत के
पाठ को बाकर पढ़ा गये, हुस्ने सुलूक, नेक तबीयत वफ़ा सेयार, औसाफ अपनी ज़ात
मे सब दिखागये। इसके अलावा सलाम मे पढ़ा- काश मुसलमां ये तो समझते, ज़ाते
अली लासानी क्यों है, नहजे बलाग़ा पढ़ के बताओं, हर जुमला कुरआनी क्यों है।
कशिश संडीलवी ने पढ़ा- हंसते हुए अजल केा गले से लगा लिया, बेशक गुलामे
आबिदे बीमार थे बाकर। मौलाना रज़ा जैदपुरी ने पढ़ा- हैं अलम और मसकीजे़ का
रिस्ता इस तरह, एक मंसब की अलामत, एक हया अब्बास की। समर कानपुरी ने पढ़ा-
हैदर की मुहब्बत मे मरने का मज़ा और बहता है लहूदार से करता है सना और, जब
उल्फ़ते हैदर ने ज़बां कट गई आमिर, तब दार पे मीशम ने किया शुक्रे खुदा और
इसके अलावा कामयाब, मोहम्मद, मोनिस सरवर, मो. जैन अब्बास ने भी नजरानये
अकीदत पेश किया। पिसराने बाकर ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
