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गन्ना फसल के मृदा परीक्षण एवं गन्ना बीज शोधन के महत्व पर जारी हुये निर्देश

जौनपुर। फसल की आवश्यकता के अनुसार मृदा में समुचित उर्वरक दिये जायं। उर्वरकों की मात्रा एवं प्रकार के निर्धारण हेतु मृदा परीक्षण आवश्यक, मृदा परीक्षण से मिट्टी में कमी एवं विभिन्न पोषक तत्वों की उपलब्धता की हो जाती है जानकारी। खादीय सन्तुलन द्वारा मृदा की उर्वरता में सुधार होता है तथा मृदा में कार्बनिक स्तर बढ़ाने व सूक्ष्म जीवाणुओं की सक्रियता बढ़ाने में सहायता मिलती है। मृदा की भौतिक, रासायनिक व जैविक संरचना में सुधार आता है। उचित एवं सन्तुलित मात्रा में पोषक तत्वों के प्रयोग से फसल की भरपूर पैदावार कम से कम व्यय में प्राप्त की जा सकती है। उक्त बातें विपिन द्विवेदी आयुक्त गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग उत्तर प्रदेश ने कही। उन्होंने गन्ना फसल हेतु मृदा परीक्षण का महत्व बताते हुये स्पष्ट किया कि पिछले दशकों में उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग से मृदा में लगातार उर्वरा शक्ति का ह्रास होता जा रहा है। अधिक उत्पादकता प्राप्त करने हेतु मृदा की भौतिक, रासायनिक व जैविक शक्ति को सन्तुलित रखने के लिये मृदा परीक्षण महत्वपूर्ण है। अधिक उपज, उच्च शर्करा प्राप्त करने व फसल को निरोग बनाये रखने हेतु गन्ने को लगभग 20 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। मुख्य पोषक तत्व नाईट्रोजन, फासफोरस, पोटाश एवं गौड़ पोषक तत्वों में सल्फर एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों में जिंक, ताम्बा, लोहा, बोरान आदि तत्वों की सन्तुलित मात्रा महत्वपूर्ण है। किसी खेत में पोषक तत्वों की कितनी मात्रा की आवश्यकता है, यह केवल मृदा परीक्षण के माध्यम से ही जाना जा सकता है। प्रदेश में इस वर्ष अब तक चीनी मिलो में स्थापित कुल 18 मृदा परीक्षण र्प्रयोगशालाओ से प्रदेश के विभिन्न परिक्षेत्रों के अन्तर्गत कुल 92419 मृदा नमूनों का परीक्षण किया गया है जिसमें परिक्षेत्र सहारनपुर में 10545, मेरठ में 6165, मुरादाबाद में 24455, लखनऊ में 13721, फैजाबाद में 8191, देवीपाटन में 7290, गोरखपुर में 4455 व देवरिया परिक्षेत्र में 17597 मृदा नमूनो का परीक्षण कराया जा चुका है। श्री द्विवेदी ने यह भी निर्देश दिया कि मृदा परीक्षण के परिणामों के आधार पर मृदा में पाये गये तत्वों की कमी एवं उर्वरक संस्तुतियों का समितियों/परिषदों प्रागंण व गांवों में वाल पेटिंग कराकर प्रचार-प्रसार कराते हुये कृषकों को जागरूक किया जाय, ताकि मृदा में तत्वों की कमी को दूर कर अधिकाधिक गन्ने की उपज प्राप्त की जा सके। श्री द्विवेदी ने शरदकालीन बुवाई के दृष्टिगत गन्ने को रोग बीमारियों से बचाने हेतु गन्ना बुवाई से पूर्व बीज शोधन को महत्वपूर्ण बताते हुये प्रदेश के समस्त उप गन्ना आयुक्तों को निर्देश जारी करते हुये कहा कि बीज शोधन हेतु एमएचएटी शोधन यंत्रों को ठीक करा लिया जाय और जिन चीनी मिलों में शोधन यंत्र नहीं है, वहां इनको स्थापित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। इससे शुद्ध रोग रहित एवं गुणवत्तापूर्ण बीज प्राप्त होगा तथा उपरोक्त दोनों कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से गन्ना उत्पादन एवं चीनी परता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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