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परमात्मा को जानने के बाद ही षुरूआत होती है भक्तिः अब्दुल

जौनपुर। निरंकार प्रभु परमात्मा को जानने के बाद ही भक्ति की षुरूआत होती है। इंसान जब तक ईष्वर की पहचान समय के सद्गुरू के चरणों में बैठकर नहीं करता तब तक वह श्रद्धालु बना रहता है और जब सद््गुरू के चरणों से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति कर लेता है तब उसकी भक्ति की षुरूआत होती है। उक्त उद्गार नगर के लाइन बाजार क्षेत्र के कलावती कुंज कालोनी में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती यादव के आवास एवं मड़ियाहूं पड़ाव स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन के प्रांगण में उपस्थित विषाल संत समूह को सम्बोधित करते हुये दिल्ली से आये केन्द्रीय प्रचारक अब्दुल गफ्फार खान ने व्यक्त किया। मंच का संचालन स्थानीय मीडिया प्रभारी उदय नारायण जायसवाल ने किया। इस अवसर पर सतवीर दीवाना, जिला पंचायत सदस्य जितेन्द्र यादव, निषा खान, जेएन पाण्डेय, ष्याम लाल साहू, रमाषंकर, वषिष्ठ नारायण पाण्डेय, राजेष प्रजापति, लालमनी यादव, पिण्टू, रामबचन यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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