पंचायत भवन में प्रधान ने जड़ा ताला, समग्र लोहिया ग्राम देवरा झलिया का हाल
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अजमी रिज़वी
सिद्धौर बाराबंकी। विकास खण्ड सिद्धौर के समग्र लोहिया ग्राम देवरा झलिया
में आंगनबाड़ी केन्द्र न होने के कारण मासूम बच्चे खुले आसमान के नीचे
बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिस पंचायत भवन में पहले केन्द्र का
संचालन होता था उस भवन में ग्राम प्रधान ने ताला जड़ दिया है। जिससे
ग्रामवासियों में आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, विकास खण्ड
सिद्धौर के ग्राम पंचायत देवरा झलिया को इस बार शासन द्वारा समग्र लोहिया
ग्राम के लिये चयनित किया गया था। जिसके बाद से विभागीय अधिकारियों की
आमद इस ग्राम पंचायत काफी बढ़ गयी। इस ग्राम पंचायत में बने पंचायत भवन
में प्रधानो द्वारा न तो कोई मीटिंग करायी जाती थी और न ही किसी काम में
प्रयोग होता था। महज इस पंचायत भवन में आंगनबाड़ी केन्द्र चलता था और गांव
के छोटे बच्चे इसमंे आकर के पढ़ाई करते थे। लेकिन जब से इस ग्राम पंचायत
को लोहिया ग्राम का दर्जा मिला। उसके बाद से ग्राम प्रधान ने सबसे पहले
पंचायत भवन मंे ताला जड़ दिया और सारा सामान उसी में बंद कर दिया। सुबह जब
आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिका बच्चों को पढ़ाने के लिये आती हैं तो वह
मासूम बच्चों को लेकर खुले आसमान के नीचे बैठती हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र का
सारा फर्नीचर भी उसी भवन में बंद है। ग्राम प्रधान का कहना है कि उक्त
भवन मेरे कब्जे में है। मैं जो चाहूंगा वो करुंगा। ग्रामवासियों ने
जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पंचायत भवन का ताला खुलवाने की मांग की है।
जिससे उस भवन में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हो सके।
सिद्धौर बाराबंकी। विकास खण्ड सिद्धौर के समग्र लोहिया ग्राम देवरा झलिया
में आंगनबाड़ी केन्द्र न होने के कारण मासूम बच्चे खुले आसमान के नीचे
बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिस पंचायत भवन में पहले केन्द्र का
संचालन होता था उस भवन में ग्राम प्रधान ने ताला जड़ दिया है। जिससे
ग्रामवासियों में आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, विकास खण्ड
सिद्धौर के ग्राम पंचायत देवरा झलिया को इस बार शासन द्वारा समग्र लोहिया
ग्राम के लिये चयनित किया गया था। जिसके बाद से विभागीय अधिकारियों की
आमद इस ग्राम पंचायत काफी बढ़ गयी। इस ग्राम पंचायत में बने पंचायत भवन
में प्रधानो द्वारा न तो कोई मीटिंग करायी जाती थी और न ही किसी काम में
प्रयोग होता था। महज इस पंचायत भवन में आंगनबाड़ी केन्द्र चलता था और गांव
के छोटे बच्चे इसमंे आकर के पढ़ाई करते थे। लेकिन जब से इस ग्राम पंचायत
को लोहिया ग्राम का दर्जा मिला। उसके बाद से ग्राम प्रधान ने सबसे पहले
पंचायत भवन मंे ताला जड़ दिया और सारा सामान उसी में बंद कर दिया। सुबह जब
आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिका बच्चों को पढ़ाने के लिये आती हैं तो वह
मासूम बच्चों को लेकर खुले आसमान के नीचे बैठती हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र का
सारा फर्नीचर भी उसी भवन में बंद है। ग्राम प्रधान का कहना है कि उक्त
भवन मेरे कब्जे में है। मैं जो चाहूंगा वो करुंगा। ग्रामवासियों ने
जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पंचायत भवन का ताला खुलवाने की मांग की है।
जिससे उस भवन में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हो सके।

