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‘यश भारती सम्मान’ समारोह में दिखा सपा में ‘ऑल इज नाट वैल’


>लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘यश भारती’ के समारोह में भी यह स्पष्ट हो गया कि सपा और यादव परिवार में अंदरूनी कलह अबी कम नही हुई है। सपा में अभी भी ‘ऑल इज नाट वैल’ है।

सपा मुखिया की गैर-मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
दरअसल, नवनिर्मित लोकभवन में आयोजित सम्मान समारोह के लिए छपे कार्ड पर समाजवादी पार्टी (सपा) मुखिया मुलायम सिंह यादव का नाम तस्वीर के साथ छपा था। यहां तक कि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में होर्डिंग और बैनरों में भी सपा प्रमुख की तस्वीर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव संग लगाई गई थी मगर कार्यक्रम स्थल पर अखिलेश यादव को छोड़कर यादव परिवार का कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था। कार्यक्रम में आए अतिथियों और पत्रकारों के बीच सपा मुखिया की गैर-मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। 

अखिलेश ने 71 विभूतियों को किया सम्मानित
पार्टी सूत्रों के अनुसार अखिलेश यादव खुद अपने पिता को कार्यक्रम में बुलाने के लिए उनके आवास पर गए थे। वह वहां करीब 15 मिनट तक रहे, मगर नेताजी (मुलायम सिंह यादव) का सम्मान समारोह में न पहुंचना हैरत भरा रहा। बाद में अखिलेश नए सचिवालय ‘लोकभवन’ में अकेले पहुंचे और एक संक्षिप्त संबोधन के बाद प्रदेश की 71 विभूतियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्हें 11 लाख रुपए नकद, प्रशस्ति पत्र और शॉल भेंट की गई। इस दौरान उन्होंने मौजूदा हालात पर कोई भी टिप्पणी नहीं की। पार्टी मुख्यालय में सोमवार को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से वाद-विवाद के बाद यह पहला मौका था जब अखिलेश ने किसी सरकारी कार्यक्रम में शिरकत की है। 

विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में बड़ा गठबंधन
दूसरी ओर पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के विधानसभा चुनाव से पूर्व मह-गठबंधन के इरादे को साकार करने की जद्दोजहद में शिवपाल सिंह यादव ने कल नई दिल्ली में जनता दल (यू) और राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं से मुलाकात की। पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह राणा की पहली पुण्यतिथि में हिस्सा लेने सहारनपुर जा रहे यादव ने गाजियाबाद में पत्रकारों से कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में बड़ा गठबंधन बनेगा। भाजपा को सत्ता में आने से रोकने की हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। 

पार्टी में एकता के लिए प्रयास जारी
इस बीच, सपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि पार्टी में एकता के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। हम सभी चुनाव से पहले एकता चाहते हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हमें शिकस्त का सामना करना पड़ेगा। वर्मा ने राज्यसभा में पार्टी का नेता बनने की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव आता है तो वह उसे स्वीकार नहीं करेंगे हालांकि इसकी वजह बताने से उन्होंने इंकार कर दिया। इस बीच, पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि पार्टी के मौजूदा हालात ठीक नहीं हैं और यह दर्शाते हैं कि पार्टी विभाजन की ओर अग्रसर है।

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