क्या इबोला वायरस इस पेड़ की देन है?
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वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी अफ़्रीक़ा में घातक इबोला वायरस के फैलने का संभवतः सबसे बड़ा कारण वह दो साल का बच्चा था जो पिछले साल गिनी के मेलियान्डू गांव में उस पेड़ के पास खेल रहा था जिसकी खोखली डालों में वायरस से संक्रमित चमगादड़ रहती थीं। यह दो साल का बच्चा इस गांव में पिछले साल दिसंबर में इबोला संक्रमण से मरने वाला पहला बच्चा था। इस बच्चे की पहचान एमिल उआमूनो बतायी गयी। इस बच्चे की मौत को इबोला से मरने वाला पहला केस माना जाता है।
एमिल उओमूनो 6 दिसंबर 2013 को मरने से पहले उस पेड़ के पास खेल रहा था जिस पर फ़्री टेल्ड बैट या लंबी दुम वाली चमगादड़ रहती थीं। इस दो साल के बच्चे को पहले तो बहुत तेज़ बुख़ार आया, फिर उलटी शुरु हुयी और फिर उसे काले रंग का मल होने लगा। इस प्रकार इस बीमारी ने चार दिन के भीतर इस बच्चे की जान ले ली और वह 6 दिसंबर 2013 को काल के गाल में समा गया। उसकी बहन पिछले साल क्रिस्मस के पहले दिन बीमार पड़ी थी और वह भी नया साल शुरु होने से पहले मौत के मुंह में चली गयी। इन बच्चों के मां, बाप और दादी ने इस साल के शुरु में यह बात बतायी थी। उसके बाद इबोला बीमारी संप्रदाय के सदस्यों में फैली और फिर गिनी के दूसरे भाग में फैलना शुरु हुयी।
ज्ञात रहे आम तौर पर फ़्रूट बैट्स या फल खाने वाली चमगादड़ प्रजाती को इबोला वायरस फैलाने वाला समझा जाता है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि लंबी दुम वाली चमगादड़ प्रजाती भी इबोला संक्रमण के लिए ज़िम्मेदार हो सकती है।
विश्व स्वास्थय संगठन डब्लयू एच ओ के अनुसार पश्चिमी अफ़्रीक़ा के गिनी, लाइबेरिया और सियरा लियोन में अब तक 20 हज़ार से ज़्यादा इबोला वायरस से संक्रमित मामले सामने आए हैं जिनमें 8000 के क़रीब मौते हुयी हैं। पश्चिमी अफ़्रीक़ा के ये तीनों देश इस वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित बताए जाते हैं।

