'क्या ताज महल एक ममी महल है?' किताब से खुले कई राज
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नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि मुगल बादशाह शाहजहां ने ताज महल से जुड़ा एक बड़ा सच पूरी दुनिया से छुपाया था। अगर वो सच उस वक्त सामने आता तो बादशाह के लिए ताज महल का निर्माण आसान नहीं रह जाता। पत्रकार व लेखक अफसर अहमद ने अपनी किताब ‘ताज महल या ममी महल?’ में मुमताज की मौत के वक्त जानबूझकर छुपाए गए इस सच का सिलसिलेवार खुलासा किया है। इस किताब का ई वर्जन हाल ही में लॉन्च हो गया।
इतिहास-नॉन फिक्शन श्रेणी में आने वाली इस किताब में मुमताज महल की मौत की वजह, उसके आखिरी वक्त और शव के संरक्षण की विधि के बारे में बताया गया है। करीब 200 पेज की हिंदी में लिखी गई इस किताब में सबसे बड़ी बात जो पिछले कुछ समय से चर्चा में है कि क्या मुमताज महल का शव एक ममी के रूप में है, इस सवाल पर भी विस्तार से रोशनी डाली गई है।
मुमताज जिसके दो अमानती दफन और एक आखिरी दफन हुआ। उनके बीच के समय में उसके शव को किस तरह सुरक्षित रखा गया। क्या वो तरीका मिश्र का था या फिर किसी और ने ऐसा कोई फार्मूला लिखा है जिससे उसके शरीर को इन दफन के दौरान सुरक्षित रखा गया। क्या अस्थाई तौर पर शव संरक्षित करने की परंपरा मुगलों में थी? और सबसे बड़ा सवाल कि क्या उसका शरीर आज भी सुरक्षित है, ऐसे कई सवाल जो इतिहास का हिस्सा हैं उनके जवाब इस किताब में खोजने की कोशिश की गई है।
किताब के लेखक अफसर अहमद का कहना है कि उनका इस किताब को लिखने का मकसद मुमताज महल की मौत के वक्त हुई उन तमाम रहस्यमय गतिविधियों से पर्दा उठाना है जो किसी न किसी वजह से इतिहास में दर्ज नहीं हैं। अफसर के मुताबिक, शाहजहां के दरबारी इतिहासकार ऐसा कर सकते थे क्योंकि उनके सामने सिर्फ वही लिखने की मजबूरी थी जिससे बादशाह की कोई गलत छवि न बने और मुमताज का दफन किस तरह हुआ इस पर कोई खास रोशनी नहीं डाली। अफसर ने कहा कि मेरे विचार से पाठकों को ये जानने का हक है कि मुमताज के दफन का राज क्या है। क्या उसका दफन आम था या फिर बादशाह शाहजहां ने उसे आम लोगों की नजर से छिपाने की कोशिश की थी? इस लिहाज से इस किताब का पाठकों के सामने आना जरूरी है।
किताब में मुमताज की मौत के कारणों को बताया गया है। किताब में उस दौर की शाही यात्राओं का भी जिक्र है। इसमें मुमताज की मौत के वक्त के हालात का भी जिक्र है। अमानती दफन की परंपरा क्या थी और उसकी असल हकीकत क्या है उस पर भी विस्तार से रोशनी डाली गई है। क्या मुगल सिर्फ इस्लामिक रिवाजों को ही मानते थे, इस सवाल का भी जवाब खोजा गया है। मुगल काल में शव को दफनाने के तौर तरीकों पर भी रोशनी डाली गई है। मुमताज का शव कैसे दफन और संरक्षित हुआ, ये भी बताया गया है। ताज पर होने वाले सालाना उर्स, ताज महल के निर्माण, उसकी मौजूदा कब्रों का भी विस्तार से जिक्र है। फिलहाल ये किताब एमेजन पर किंडल फोर्मेट में उपलब्ध है। इसे इस लिंक पर क्लिक करके देखा और खरीदा जा सकता है। जल्द ही किताब का अंग्रेजी भाषा में ई संस्करण भी लॉन्च होगा।
लेखक के बारे में:-करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। ईटीवी से कैरियर की शुरुआत की। फिर 2001 में बैनेट एंड कोलमेन (टाइम्स ऑफ इंडिया) के ऑनलाइन हिंदी संस्करण नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से दिल्ली में पत्रकारिता के सफर की शुरुआत। उसके बाद नवभारत टाइम्स के प्रिंट संस्करण में काम किया। 2008 में नेटवर्क18 से जुड़े। वर्तमान में IBNKhabar (IBN7 वेबसाइट) के संपादक के रूप में कार्यरत। मुगल इतिहास पर शुरुआत से ही कई आर्टिकल लिखे।

