अन्धविश्वास : जमशेदपुर में मासूमो को गर्म छड से जाता है दागा
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जमेशदपुर। झारखंड के जमशेदपुर में सालों से एक ऐसी प्रथा चली आ रही है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यहां छोटे बच्चों को गर्म लोहे की छड़ से दागने की प्रथा है। भले ही इसे आधुनिक समाज अंधविश्वास मानें लेकिन जनजाति समुदाय की इस रिवाज में गहरी आस्था है।
हर साल मकर संक्रांति के दूसरे दिन सूर्य उगते ही इसका आयोजन होता है जो लगभग एक घंटे तक चलता है। जनजाति समुदाय से जुड़े लोग इसे पेट के स्वास्थ्य के लिए जरूरी कदम मानते हैं और ये लोगों की धार्मिक आस्था से भी जुड़ी है। पिछले तीस-पैंतीस सालों से चिड़ी दाग की रश्म निभाई जा रही है।
ग्रामीणों की मान्यता है कि ऐसा करने से अगले एक साल तक बच्चे को पेट से संबंधित कोई रोग नहीं होता है। यही नहीं लोग ये भी मानते हैं कि इससे मोटापा नहीं बढ़ता है। अकेले करनडीह में ही कई बस्तियों में इसका आयोजन हुआ जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अपने बच्चों को इसमें शामिल किया।
कुछ बच्चे तो इसके आदी हो चुके हैं और वो बिंदास तरीके से इसमें शामिल रहे हैं, लेकिन बहुत ही छोटे बच्चे और नन्हें मुन्नों के पेट यूं दगाते देख किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाए। फिर भी लोग अपनी भावनाओं को काबू में करके ये काम करते हैं।
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