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नवजात की धड़कन हुई बंद, जुगाड़ से किया जिंदा

झारखंड | झारखंड के जमशेदपुर में दो डॉक्टरों ने ‘थ्री इडियट्स’ की तर्ज पर जुगाड़ कर एक घंटे के नवजात की जिंदगी बचा ली। बच्चा बुधवार को जन्मा था, पर घंटे भर बाद सांसें रुक गईं थीं। दरअसल, बच्चे ने गर्भ में मौजूद पानी (मैकोनियम) पी लिया था। यह सांस की नली से फेफड़ों में चला गया था। इस कारण धड़कन बंद हो गई थी। मेडिकल में इसे सिवेरियन बर्थ कहा जाता है | ऐसी स्थिति में इलाज के लिए सी-पैप नाम की मशीन जरूरी होती है। लेकिन अस्पताल में चार लाख रुपए की यह मशीन नहीं थी। डॉक्टरों ने बच्चे को फौरन बड़े अस्पताल ले जाने को कहा। बच्चे के माता-पिता अंबिका और सिदाम राय ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं। तभी दो जूनियर डॉक्टरों को तरकीब सूझी। डॉ. मनीष भारती और डॉ. रविकांत भगवान ने अस्पताल में मौजूद 90 रुपए की चीजों से ही सी-पैप जैसी मशीन बना ली। तीन घंटे के प्रयास से बच्चा बच गया।

मामला जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल का है। अंबिका और सिदाम के लिए दोनों डॉक्टर फरिश्ते बन गए और हॉस्पिटल के लिए हीरो। डॉ. रविकांत ने बताया कि उन्होंने दो चीजें लीं। 60 रुपए की पीडिया ड्रिप और 30 रुपए की थ्री-वे कैनूला। दोनों को ऑक्सीजन सिलेंडर से जोड़ा। कैनूला के एक सिरे से ऑक्सीजन दी और दूसरे सिरे को ड्रिप से जोड़ा। तीसरे सिरे को बच्चे की नाक से जोड़कर आक्सीजन दी। बच्चे ने सांस ली और हवा छोड़ी। इसके साथ गैसें अलग हो गईं और ड्रिप में मौजूद पानी से बने प्रेशर से एयरवे खुला रखा गया। सी-पैप से यही किया जाता है

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