चहेतों को MLC बनाने की मुलायम की मंशा को राज्यपाल का झटका
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लखनऊ । विधान परिषद की 25 मई को खाली हो रही 9 सीटों के लिए यूपी सरकार ने जिन दावेदारों के नामों की फेहरिस्त राजभवन भेजी थी उसे वापस ले लिया है।
यूपी की अखिलेश सरकार ने कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाले विशिष्ट लोगों के लिए आरक्षित इन नौ सीटों के लिए राज्यपाल के पास नाम भेजे थे। यूपी सरकार ने जो नाम राज्यपाल के पास भेजे थे उनमें लालू यादव के समधी समेत कुछ बिल्डरों और सपा नेताओं के नाम शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से एक भी नाम ऐसा नहीं है जो इस पद की क़ाबिलियत रखता हो।
राज्यपाल ने यूपी सरकार को उनकी भेजी हुई एमएलसी प्रत्याशियों की लिस्ट वापस करते हुए सरकार से जवाब मांगा है। राज्यपाल ने तीन बिंदुओं पर अखिलेश सरकार से जवाब मांगा है। अखिलेश सरकार ने राज्यपाल के पास बिल्डरों, नेताओं के नाम कला, साहित्य और संस्कृति क्षेत्र में काम करने के लिए भेजे थे।
यूपी सरकार इन्हें बनाना चाहती थी एमएलसी-
1- कमलेश पाठक: सपा के टिकट पर 2009 में लोकसभा चुनाव लड़े। इनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।
2- जितेंद्र यादव: लालू प्रसाद यादव के समधी हैं और मुलायम के काफी करीबी हैं।
3- रामवृक्ष यादव: यूपी सरकार में पूर्व राज्यमंत्री रहे और मुलायम के करीबी होने के साथ ही कन्नौज में डिंपल यादव के चुनाव में अहम भूमिका अदा की।
4- एसआरएस यादव: पूर्व नौकरशाह और समाजवादी पार्टी के वर्तमान प्रदेश सचिव।
5- संजय सेठ: यूपी की एक दर्जन से ज्यादा रीयल स्टेट कंपनियों के मालिक होने के साथ ही शालिमार समूह के चेयरमैन हैं। संजय सेठ मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक के करीबियों में हैं और कहा जाता है कि दोनों के व्यवसायिक रिश्ते भी हैं।
6- रणविजय सिंह: गोंडा से ताल्लुक रखने वाले हैं और समाजवादी पार्टी के नेता हैं।
7- लीलावती कुशवाहा: फैजाबाद से आने वाली लीलावती दो दशकों से समाजवादी पार्टी की वर्कर हैं और महिला कल्याण विभीग की चेयरपर्सन हैं।
8- राजपाल कश्यप: समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव होने के साथ ही मत्स्य विकास निगम के चेयरमैन भी हैं, राज्यमंत्री का दर्जा दे रखा है। टीम अखिलेश के अहम सदस्य हैं।
9- सरफराज खान: सपा के टिकट पर 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और आजम खान के बेहद क़रीबी लोगों में शुमार हैं ।
यूपी की अखिलेश सरकार ने कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाले विशिष्ट लोगों के लिए आरक्षित इन नौ सीटों के लिए राज्यपाल के पास नाम भेजे थे। यूपी सरकार ने जो नाम राज्यपाल के पास भेजे थे उनमें लालू यादव के समधी समेत कुछ बिल्डरों और सपा नेताओं के नाम शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से एक भी नाम ऐसा नहीं है जो इस पद की क़ाबिलियत रखता हो।
राज्यपाल ने यूपी सरकार को उनकी भेजी हुई एमएलसी प्रत्याशियों की लिस्ट वापस करते हुए सरकार से जवाब मांगा है। राज्यपाल ने तीन बिंदुओं पर अखिलेश सरकार से जवाब मांगा है। अखिलेश सरकार ने राज्यपाल के पास बिल्डरों, नेताओं के नाम कला, साहित्य और संस्कृति क्षेत्र में काम करने के लिए भेजे थे।
यूपी सरकार इन्हें बनाना चाहती थी एमएलसी-
1- कमलेश पाठक: सपा के टिकट पर 2009 में लोकसभा चुनाव लड़े। इनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।
2- जितेंद्र यादव: लालू प्रसाद यादव के समधी हैं और मुलायम के काफी करीबी हैं।
3- रामवृक्ष यादव: यूपी सरकार में पूर्व राज्यमंत्री रहे और मुलायम के करीबी होने के साथ ही कन्नौज में डिंपल यादव के चुनाव में अहम भूमिका अदा की।
4- एसआरएस यादव: पूर्व नौकरशाह और समाजवादी पार्टी के वर्तमान प्रदेश सचिव।
5- संजय सेठ: यूपी की एक दर्जन से ज्यादा रीयल स्टेट कंपनियों के मालिक होने के साथ ही शालिमार समूह के चेयरमैन हैं। संजय सेठ मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक के करीबियों में हैं और कहा जाता है कि दोनों के व्यवसायिक रिश्ते भी हैं।
6- रणविजय सिंह: गोंडा से ताल्लुक रखने वाले हैं और समाजवादी पार्टी के नेता हैं।
7- लीलावती कुशवाहा: फैजाबाद से आने वाली लीलावती दो दशकों से समाजवादी पार्टी की वर्कर हैं और महिला कल्याण विभीग की चेयरपर्सन हैं।
8- राजपाल कश्यप: समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव होने के साथ ही मत्स्य विकास निगम के चेयरमैन भी हैं, राज्यमंत्री का दर्जा दे रखा है। टीम अखिलेश के अहम सदस्य हैं।
9- सरफराज खान: सपा के टिकट पर 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और आजम खान के बेहद क़रीबी लोगों में शुमार हैं ।

