कौशांबी : ज़िला अस्पताल मे इंजेक्शन से दर्जनो की हालत बिगड़ी !
अशोक केसरवानी
कौशाम्बी । जिला अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती मरीजों को
शनिवार की शाम को स्टाफ नर्स ने करीब डेढ़ दर्जन मरीजों को रुटीन जांच के
बाद एंटीबायोटिक इंजेक्शन का डोज दिया था। इंजेक्शन लगने के बाद रात को
मरीजों की हालत बिगड़ गई थी। बदन में जलन व बुखार से मरीज पीड़ित हो गए थे।
असहनीय दर्द से मरीज कराहने लगे थे। उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी। दर्द और
बेचैनी के साथ ही बेहोशी की हालत में वे पहुंचने लगे थे। तभी इमरजेंसी
में रहे डॉक्टरों ने किसी तरह मरीजों की जान बचाई। साथ ही इसकी जानकारी
विभाग के उच्चाधिकारियों को दी। रविवार को दिन भर अस्पताल में इसकी चर्चा
रही, लेकिन डॉक्टर चुप्पी साधे बैठे रहे। स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच
गया। सीएमएस डा. रामजी पांडेय ने जांच के बाद सोमवार को डॉक्टरों की बैठक
बुलाई, साथ ही लगाए गए इंजेक्शन की बाबत समीक्षा की। खुलासा हुआ कि स्टाफ
नर्स ने जेंटामाइसीन एंटीबायोटिक इंजेक्शन मरीजों को लगाया था, इसके बाद
हालत बिगड़ी। समीक्षा के बाद यह भी पता लगाया गया कि जेंटामाइसीन इंजेक्शन
अस्पताल में कब आया। स्टोर इंचार्ज ने बताया कि इंजेक्शन की शनिवार को ही
खेप आई है। शाम को इसको स्टाफ नर्स को दिया गया। इसके बाद यह घटना हुई।
डॉक्टरों ने इंजेक्शन की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाए। फैसला लिया गया
कि इसका सैंपल जांच के लिए भेजा जाए। इस पर सभी लोग एकराय थे। इसके बाद
अचानक सीएमएस ने निर्णय लिया कि जांच के लिए इंजेक्शन का सैंपल नहीं भेजा
जाएगा, साथ ही सफाई दी कि राइजर यानि ग्लूकोज के साथ इंजेक्शन देने पर
मरीजों के साथ ऐसा हुआ। बताया कि कुल चार मरीजों की हालत बिगड़ी थी। कोई
बड़ी बात नहीं हुई। स्थिति सामान्य है। सीएमएस के इस पलटवार से महकमे में
तमाम तरह की चर्चाएं हैं।घटना के बाद से इंजेक्शन देने वाली स्टाफ नर्स
अचानक गायब हो गई है। जिला अस्पताल स्टाफ नर्स नहीं आ रही है। सीएमएस डा.
रामजी पांडेय का कहना है कि स्टाफ नर्स अवकाश पर गई है। अस्पताल में
चर्चा है कि उसको जान बुझकर हटाया गया है।
सीएमएस डा. रामजी पांडेय इंजेक्शन लगने के बाद मरीजों की बिगड़ी हालत पर
अपना बयान पल-पल बदलते रहे। पहले सीएमएस कह रहे थे कि हो सकता है रिएक्शन
होने की वजह से मरीजों की हालत बिगड़ी हो, क्योंकि इसकी आशंका सबसे ज्यादा
है। सोमवार को उन्होंने चिकित्सकों के साथ बैठक की तो इंजेक्शन की ही
गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाए गए। इंजेक्शन की जांच कराने का फैसला
लिया गया। सबकुछ ठीकठाक चल रहा था। अचानक सीएमएस जांच कराने के नाम से
मुकर गए और बताया कि राइजर होने से मरीजों की हालत बिगड़ी। एक तरफ
डॉक्टरों का कहना है कि इंजेक्शन से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को
रिएक्शन नहीं हो सकता है। रिएक्शन का ही दूसरा प्रारूप है राइजर है। ऐसे
में मरीजों को राइजर कैसे हुआ, इस पर सीएमएस चुप्पी साध ले रहे हैं। इतना
ही नहीं वह कुल चार मरीजों की ही गलत इंजेक्शन से तबीयत बिगड़ने का दावा
कर रहे हैं।
जिला अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगने से बिगड़ी मरीजों की हालत को लेकर
रविवार तक सीएमएस संवेदनशील थी। सोमवार को बैठक करने के बाद सीएमएस ने इस
मामले को सिरे से खारिज कर दिया। वह न तो इंजेक्शन की जांच कराने को
तैयार है, न ही इस प्रकरण की वह जांच कराना चाहता हैं कि आखिर ऐसा हुआ
क्यों। स्टाफ नर्स से भी कोई पूछताछ नहीं की गई। स्टाफ नर्स के सामने आने
से हंगामा होने का खतरा था, इसलिए नर्स को जबरन अवकाश पर बाहर भेज दिया गया ।

