जो अच्छाई की दावत नहीं देते और बुराई से नहीं रोकते ऐसे लोग हुसैनी नहीं कहे जा सकते -सैय्यद मुहम्मद मासूम
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दुबग्गा लखनऊ में इस्तेखबाल ए अज़ा की मजलिस को खिताब करते हुए जनाब सैय्यद मुहम्मद मासूम । जनाब मासूम साहब ने कहा कर्बला एक नसीहत है जिस से सीखते हुए दुनिया का हर इंसान अपने को संवार सकता है और पैग़ाम ए इंसानियत लोगों तक पहुंचा सकता है ।
किसी अच्छे और नेक इंसान को इतना ना सताओ कि वो बुरा बनने को मजबूर हो जाय या अकेला जीने पे मजबूर हो जाय और जब जब ऐसा हुआ उसका ज़िम्मेदार ये समाज होता है जो अच्छाई की दावत नहीं देता नेक इंसान का साथ नहीं देता और बुराई को रोकने की जगह या तो बुरे का साथ देता है या फिर ज़ुल्म देख के चुप बैठता है ।
इस दुनिया में सारे ज़ुल्म और बुराइयों के ज़िम्मेदार ऐसे ही लोग हैं जो अच्छाई की दावत नहीं देते और बुराई से नहीं रोकते ऐसे लोग ना तो इन्सान कहे जा सकते हैं ना मुसलमान और ना ही हुसैनी ।
कर्बला में भी इमाम हुसैन (अ.स ) की शहादत के जिम्मेदार ऐसे ही लोग थे और आज भी मक़सद ए हुसैन को नुकसान ऐसे ही लोगो से पहुँच रहा है ।
