गरीब का घर रौशन कर जलायें खुशी के दीप
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जौनपुर। दीपावली के पर्व पर जहां घरों और दुकानों पर भव्य सजावट का नजारा दिखाई दे रहा है और विभिन्न प्रकार के सामानों की बाजारों में खुरीददारी हो रही है, आतिशबाजी की सतरंगे प्रकाश भी आसमान पर चमक रहे हैं लेकिन सुख समृद्धि के इस त्योहार की खुशी से बड़ा तबका वंचित रह जाता है। गरीबी और लाचारी के चलते यह लोग दूर से ही दूसरों की खुशियां देखकर मन बहला लेते है। जरूरत इस बात है कि हम अपनी खुशियों के साथ इनके आंगन भी रोशन करें, इनके घर के खुशियों के दीप जलायें। दीपावली पर लक्ष्मी गणेश पूजन पर हम भगवान श्री राम के अयोध्या पहुंचने पर स्वागत करते है। एक गरीब जितना कई माह में नहीं कमा पाता उतना लोग आतिशबाजी में खर्च कर देते है। इससे पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है। मानव शरीर का सामान्य चक्र भी प्रभावित होता है। पटाखों के साथ इको फ्रेण्डली दीवाली मनायी जाय तो उससे बचे रूपयों से गरीबों के घर भी जगमग हो उठेगें। शहर से लेकर गांवों तक अनेक ऐसे घर है जिस दिन काम मिलता है उसी दिन उनके घर चूल्हा जलता है। किसी के घर में कमाने वाला है तो किसी के घर वह भी नहीं। सिर्फ वृद्ध महिला और पुरूष ही है। छोटे सी सीलन भरे कमरे में मिट्टी के तेल की ढिबरी से गुजारा होता है। मलिन बस्तियों में रहने वालों के साथ ही कूड़ा करकट बीनने वालों की जिन्दगी में खुशियों की रोशनी भरने का संकल्प लिया जा सकता है। इन परिवार के बच्चों कक शिक्षा एवं स्वास्थ्य की भी हालत बदतर है। दीप पर्व पर ममद का हाथ इनके जीवन में व्याप्त अंधकार को दूर कर सकेगा।
