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नशे में धुत जिला अस्पताल का डाक्टर एसके सिंह बना शैतान, लावारिस मिली नवजात बालिका को फेंका


अज़मी रिज़वी  
चाइल्ड लाइन की टीम बालिका को रात में अस्पताल में भर्ती कराने का कर रही थी अनुरोध
मामला आधी रात का पुरूष अस्पताल से चलकर महिला अस्पताल में किया गुण्डागर्दी

बाराबंकी। जिला अस्पताल के डाक्टर एसके सिंह नशें में धुत होकर मानवता को तार.तार कर दिया। लावारिश मिली नवजात बालिका को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराने गई चाइल्ड लाइन टीम के साथ अभद्रता कर दुत्कार कर भगाया गया जब टीम वहां से महिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर नवजात को गई और भर्ती कराने की कार्रवाई करा ही रही थी कि तो रात साढे़ बारह डा एसके सिंह महिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे और चाइल्ड लाइन टीम के निदेशक रत्नेश कुमार की कालर पकड़कर घसीटते हुए अस्पताल से बाहर कर दिया और लात घूंसों से पिटाई करते हुए नवजात को छीनकर फेंकने का प्रयास किया। चाइल्ड लाइन टीम जब वहां से जान बचाकर निकलने का प्रयास किया तो बाइक को घसीटकर गिरा दिया।
बताते चलें कि कोतवाली रामसनेहीघाट क्षेत्र के ग्राम करौंधिया के निकट बीते मंगलवार की अपरान्ह 2 बजे के करीब नवजात बालिका को झाड़ियों में पड़ी होने की सूचना ग्राम प्रधान द्वारा 1098 चाइल्ड लाइन की गई सूचना पर चाइल्ड लाइन जिला उप केन्द्र के निदेशक रत्नेश कुमार के निर्देशन में टीम के सदस्य अंजली जायसवालए शांति देवी , अवधेश कुमार व रामकैलाश मौके पर जाकर बालिका को बरामद करते हुए स्थानीय पुलिस को सूचित किया और पुलिस ने फिर चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। चाइल्ड लाइन टीम ने बाल कल्याण समिति को अवगत कराया जहां से तत्काल चिकित्सीय व्यवस्था कराने के निर्देश दिये। चूंकि नवजात को चींटा और कीड़ी से घिरी थी जिसके फलस्वरूप टीम ने पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनीकोडर नवजात को ले गई जहां से बालिका को जिला अस्पताल रिफर कर दिया। जिला अस्पताल में तैनात डा एसके सिंह नवजात को तुरन्त लखनऊ मेडिकल कालेज रिफर कर दिया। चाइल्ड लाइन टीम नवजात को मेडिकल कालेज ले गई जहां रात 11 बजे तक भर्ती कराने की जद्दोजहद की गई किन्तु नवजात को मेडिकल कालेज में नही लिया गया। इस सम्बंध में कालेज के उप मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा प्रकाश से मो0 न0 9415091497 पर पीड़ित द्वारा बात कर शिशु को भर्ती करने का अनुरोध किया गया किन्तु शिशु भर्ती नही हो सका। थक हार कर चाइल्ड लाइन टीम नवजात को रात बारह बजे वापस फिर जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंची और रात भर रख लेने का अनुरोध किया जिस पर इमरजेंसी में तैनात स्टाफ डा एसके सिंह जो आवास पर थे , से फोन पर बात किया और टीम के निदेशक रत्नेश कुमार से फोन पर बात कराई तो डा एसके सिंह ने नशें में धुत होकर फोन पर कहा कि अबे साले तुम फिर इसे यहां ले आये इसे अस्पताल में नही रखा जायेगा। टीम के अनुरोध पर कि बची हुई आधी रात भर के लिए कोई बेड दे दो सुबह बाल न्यायपीठ के बैठने पर नवजात को बालगृह भेज दिया जायेगा। लेकिन डाक्टर नही पसीजे और नवजात व चाइल्ड लाइन टीम को पुरूष अस्पताल से दुत्कार कर भगा दिया गया। इस पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए रत्नेश कुमार ने बाल न्यायपीठ के न्याययिक सदस्य डा सुरेश चन्द्र शर्मा को हस्तक्षेप करने को कहा जो डा शर्मा का फोन नही उठाया। इस पर बाल न्यायपीठ ने महिला अस्पताल की इमरजेंसी में दिखा लेने का निर्देश दिया।
चाइल्ड लाइन के रत्नेश कुमार ने वहीं से जिला महिला अस्पताल के अधीक्षक डा0 रविचन्द्र किशोर से लावारिश नवजात शिशु के बारे में बताया और अनुरोध किया कि रात भर के लिए इसे भर्ती कर लीजिए सुबह बाल कल्याण समिति के बैठने पर इसे बालगृह भेजने की कार्यवाही होगी। इस पर डा किशोर ने इमरजेंसी पहुंचने व वहां तैनात नर्स से बात कराने को कहा। जब चाइल्ड लाइन टीम के उक्त सदस्यों ने मेरे साथ शिशु को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुचे तो वहां ड्यूटी पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डा0 प्रेम दयाल जो अपने आवास पर थे,  को दिखाया गया तो उन्होंने शिशु को स्वस्थ्य बताया और सलाह दी कि इसे गर्म रखों और रात भर के लिए यहीं रोकने की व्यवस्था करा लो। टीम जब महिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में शिशु को लेकर पहंची तो तैनात नर्सों ने सहानुभूति दिखाई और शिशु को भर्ती करने को तैयार हो गई। शिशु को भर्ती करने की कार्यवाही की ही जा रही थी कि रात 12 : 30 बजे के करीब डा0 एसके सिंह महिला अस्पताल की इमरजेंसी में नशे में धुत होकर आ धमके और रत्नेश कुमार व चाइल्ड लाइन टीम को गाली देते हुए धक्के मार कर बाहर करने लगे जब टीम ने जब इसका विरोध किया तो एसके सिंह ने रत्नेश कुमार का गला दबाकर गिरा दिया और घसीटकर अस्पताल के बाहर कर लात.घूंसों से मारने लगे जिससे पीड़ित को अन्दरूनी चोंटें आई। इसी बीच चाइल्ड लाइन टीम की सदस्य अंजली जायसवाल से शिशु को फेंकने के लिए छीना.झपटी करने लगे जिससे अंजली जायसवाल शिशु को लेकर गिर गई। वहीं महिला कार्यकर्ता शान्ती देवी से भी अभद्रता किया। पीड़ित को पिटता देख कुछ मरीजों के तीमारदारों व प्रत्यक्षदर्शियों ने पीड़ित को डा0 सिंह के चुंगुल से छुड़ाया।  पीड़ित जान बचाकर बाइक स्टार्ट कर भागने लगा तो बाइक पकड़कर गिरा दिया। किसी तरह अपने को छुड़ाकर टीम के लोग कोतवाली नवजात सहित पहुंचे और तहरीर दी। बुधवार की दोपहर में बाल न्यायपीठ के बैठने पर चाइल्ड लाइन टीम ने पीठ के समक्ष नवजात को प्रस्तुत किया जहां से बालिका को राजकीय बालगृह भेज दिया गया।


सीडब्ल्यूसी ने कड़ा रूख अपनायाए होगी कठोर कार्यवाही

बाराबंकी। चाइल्ड लाइन टीम के साथ डा एसके सिंह द्वारा की गई मारपीट व महिला कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता व नवजात को फेंकने के प्रयास की इस घटना को बाल न्यायपीठ ने गम्भीरता से लिया है। पीठ ने डाक्टर के विरूद्ध कठोर कार्रवाई किये जाने की कार्रवाही कर रही है। पीठ के बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व न्यापीठ के प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अंगद कुमार सिंह ने घटना की निंदा की और कहा कि यह घटना मावाधिकार के उल्लंघन के साथ ही नवजात बालिका के संरक्षण ने करने व सरकारी ड्यूटी का निर्वहन नही किया है। इसकी कठोर कार्यवाही होगी।
CMO का सीयूजी रात भर रहा बंद

बाराबंकी। लावारिश मिली नवजात बालिका को अस्पताल में भर्ती कराने की मदद के लिए बड़े जिम्मेदार अधिकारियों के फोन नही उठे। जिलाधिकारी को कई बार प्रकरण से अवगत कराने के लिए रात में फोन किया गया किन्तु फोन नही उठा। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अपना सीयूजी फोन स्विच आफ रहा।

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