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वर्ष 2005 से शुरू हुये मस्तिष्क ज्वर पर रोक टीकाकरण से ही संभवः प्रो. केपी कुशवाहा

जौनपुर मंे आयोजित दो दिवसीय 36वीं उत्तर प्रदेश बाल रोग अकादमी का हुआ समापन
सेमिनार में लिया गया निर्णय- गरीब बच्चों के उपचार में सहयोग करेगा यूपी पेडिकॉन
जौनपुर। एक दशक से पूर्वांचल में महामारी के रूप ले चुका मस्तिष्क ज्वर का प्रकोप कम हो रहा है। वर्ष 2005 से शुरू हुआ मस्तिष्क ज्वर का प्रकोप अब थमने लगा है जिस पर रोक टीकाकरण से ही संभव हो पाया है। उक्त बातें जौनपुर में पहली बार आयोजित 36वीं उत्तर प्रदेश बाल रोग अकादमी के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद मेडिकल कालेज गोरखपुर के पूर्व प्राचार्य प्रो. केपी कुशवाहा ने कही। उन्होंने कहा कि यूपी पेडिकॉन गरीबों के बच्चों के उपचार में सहयोग करेगा। वर्तमान में एंट्रो वायरल का प्रकोप बढ़ रहा है जिसको नियंत्रित करने में दो-तीन सप्ताह लग जा रहे हैं। इसके अलावा एक्रब टाइफस भी खतरनाक है जिस पर सलाह है कि बच्चों को कुपोषण व रक्त अल्पता से बचायें। इसी क्रम में मेदांता गुड़गांव के डा. बीएल गुप्ता ने लीवर फेल्योर पर चर्चा करते हुये उन्होंने लीवर ट्रांसप्लाण्ट व जांच करके कब अच्छे अस्पतालों में रेफर किया जाय, इसकी जानकारी देते हुये कहा कि लीवर खराब होने का प्रमुख कारण हेपेटाइटिस बी है। इससे बचने हेतु टीकाकरण आवश्यक होता है। कार्यक्रम संयोजक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. विनोद सिंह ने मस्तिष्क ज्वर के कारण, लक्षण व उपचार पर चर्चा करते हुये कहा कि झटका व बेहोश होने पर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाय तो बचने की संभावना अधिक हो जाती है। इस पर उन्होंने सलाह दिया कि पीड़ित को सांस की शिकायत हो तो वेल्टीनेटर पर रखें। लखनऊ के निरंजन ने टीकाकरण तो बीएचयू के अंकुर सिंह ने पैदाइशी मेटा बोलिंग बीमारियों पर जानकारी दिया। अलीगढ़ मेडिकल कालेज की डा. फरजाना ने ट्यूबर क्लोसिस व डा. मनागर अली ने बच्चों के पेशाब में रक्त आने के कारण पर प्रकाश डाला। कानपुर मेडिकल कालेज के एचओडी डा. यशवंत राव ने मिर्गी के दौरे पर जानकारी देते हुये बताया कि प्रसव के दौरान आक्सीजन की कमी के कारण दौरे पड़ने की ज्यादा संभावना होती है। सुरक्षित प्रसव से इससे बचा जा सकता है। दूसरा कारण फीताकृमि का लारवा होता है जो दिमाग में पहुंच जाते हैं। इससे बचने के लिये सफाई पर अधिक ध्यान दें। शौच के बाद और भोजन के पूर्व साबुन से विधिवत हाथ धोयें। साग-सब्जी उबालकर खायें तथा स्वच्छ पानी का सेवन करें। अधिवेशन के समापन अवसर पर यूपी पेडिकॉन के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. एनसी प्रजापति ने कहा कि कुपोषण व उपचार के अभाव में गरीबों के बच्चों की मौत हो जाती है। धनाभाव में असमय मौत न हो, इसके लिये उपचार में सभी मिलकर सहयोग करें। इस दौरान सेमिनार में प्रतिभाग करने वालों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन बाल रोग विशेषज्ञ डा. तेज सिंह और स्वागत भाषण पेडिकान के डा. अजित कपूर, जिलाध्यक्ष डा. लालजी प्रसाद, डा. संदीप सिंह ने किया। साथ ही डा. क्षितिज शर्मा, डा. फैज, डा. अशोक यादव और डा. मुकेश शुक्ला ने समस्त आगंतुकों के प्रति आभार जताया। अतिथि चिकित्सकों का स्वागत डा. अशोक सिंह, डा. वीपी सिंह, डा. एचपी सिंह, डा. अरविन्द, डा. सरोज यादव, डा. रेनू गुप्ता, डा. अभिषेक मिश्र ने किया। सेमिनार में देश के लगभग 400 बाल रोग विशेषज्ञों ने सहभागिता किया। अन्त में कार्यक्रम संयोजक डा. विनोद कुमार सिंह ने सफल आयोजन में सहयोग हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

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