अजादारी और नमाज इंसान को गुनाहों से बचाता है : मौलाना मुराद
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। अल्लाह ने अजादारी के साथ-साथ नमाज कायम करने की हिदायत दी है। क्योंकि नमाज को बचाने के लिये इमाम हुसैन ने कर्बला में एक मिसाल पेश की है।
उक्त बाते अन्जुमन गुन्चए अब्बासिया के तत्वाधान में देवा रोड स्थित मौलाना गुलाम अस्करी हाल में शब्बेदारी आयोजित की गयी। जिसमें मौलाना मुराद रजा ने मजलिस को सम्बोधित करते हुये कहा
। मौलाना ने आगे कहा कि रात भर जागकर शब्बेदारी तो हम लोग करते हैं लेकिन सुबह होते ही बिस्तर पर सो जाते हैं। सुबह की नमाज को फरामोश करते हैं। ऐसे अजादारी से कोई फायदा नही जो नमाज को भूल जाते हैं। ऐसा न हो कि हर्श के मैदान में तुमसे तुम्हारा मौला नाराज हो जाये। उन्होने कहा कि आज हमारे बीच में कुछ ऐसे लोग हैं जो तरह तरह के फतवे देते रहते हैं। ऐसे लोगों से होशियार हो जाये। मौलाना ने हजरत अब्बास की वफा की मिसाल पेश करते हुये कहा कि हजरत अब्बास वफा के साथ शुजाअत का आलम ये था कि अपनी नजरों से यजीद की फौजों को रोक देते थे। आज पूरी दुनिया में हजरत अब्बास अलमबरदार का अलम उठाया जाता है। अन्त में मौलाना ने हजरत अब्बास के दर्दनाक मसायब बयान किये।
जिसे सुनकर अजादार रो पड़े। इसके बाद अलम का जुलूस निकाला गया। मजलिस से पूर्व कशिश सण्डीलवी , बाकर नकवी , मुजफ्फर इमाम , अजमल किन्तूरी , कामयाब सण्डीलवी ने नजरानये अकीदत पेश किया। इससे पहले आसिफ हुसैन के आवास पर मजलिस को मौलाना मो रजा जैदपुरी ने सम्बोधित करते हुये कहा कि जिहाद के नाम पर बेगुनाह लोगों का खून बहाना ये इस्लाम ने नही बताया है। इस्लाम तो प्यार अमन मोहब्बत एक दूसरे भाई का ख्याल रखना बताता है। उन्होने कहा कि इस्लाम तलवार की जोर पर नही बल्कि एखलाक मोहब्बत से मिला है। अगर इमाम हुसैन कर्बला में अपना पूरा घरबार न लुटाते तो इस्लाम का नाम लेने वाला कोई न होता।
अन्त में मौलाना ने इमाम जैनुल आब्दीन के मसायब बयान किये। मीसम काजमी ने अपने अंदाज में नोहाख्वानी की। अन्जुमन इमामियां , अन्जुमन गुलामे अस्करी व अन्जुमन गुन्चय अब्बासिया के नौजवानों ने नोहाख्वानी व सीनाजनी की। देर रात तक मजलिस का कार्यक्रम चलता रहा। कार्यक्रम समाप्ति के बाद अन्जुमन के अराकीनों ने अजादारों का शुक्रिया अदा किया।

