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जीवन का सर्वोपरि धर्म है उत्तम चरित्रः संत शिरोमणि

शीतला धाम में आयोजित कथा में उमड़ रही भारी भीड़
जौनपुर। उत्तम चरित्र जीवन का सर्वोपरि धर्म है। अमीरी-गरीबी, सुख-दुख, भाग्य व कर्मों के अनुसार सबके जीवन में आता है। चरित्र की रक्षा से हर परिस्थिति में समाज व भगवान की नजर में जीव सम्मन या आदर का अधिकारी होता है। उक्त विचार पूर्वांचल की शक्तिपीठ मां शीतला चौकियां धाम में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन परम पूज्य संत शिरोमणि आत्म प्रकाश सरस्वती जी महाराज ने व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि एक वेश्या के साथ चरित्र बिगड़ जाने पर समाज में घृणा के पात्र बने अपनी विवाहिता पत्नी का सम्मान न करके पराई स्त्री से जो आशक्ति लगाता है, वह भयंकर नरक के दुख का अधिकारी होता है। महाराज जी ने कहा कि समाज की सम्पत्ति व व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना सबसे बड़ा पाप है। भगवान श्रीराम का अवतार हर जाति व धर्म के प्राणी को न्याय दिलाना एवं सुख-शान्ति और प्रेम का उत्तम व्यवस्था देने के लिये होता है। अन्त में भगवान श्रीराम व माता सीता की झांकी प्रस्तुत की गयी जिसे देखकर उपस्थित लोग मंत्र-मुग्ध हो गये। इस अवसर पर विश्वनाथ माली, सचिन, विनय, आकाश, प्रवीण, अनिल, जय प्रकाश वर्मा, सलीम खां, आचार्य बाल गोविन्द, विपिन माली के अलावा सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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