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गर्भवती महिलाओं को नही मिल रहा पोषाहार


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। सरकार द्वारा चलायी जा रही बाल विकास परियोजना अपने उदेश्य से भटक गयी है कुपोषण से बचाने के लिये बच्चों व गर्भवती महिलायों को आंगनबाडी केन्द्रों से पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है लेकिन पोषाहार पशुओं के लिए पशु आहार बनकर रह गया है गर्भवती महिलाओं व बच्चों को पोषाहार आंगनबाडी कार्यकत्री द्वारा न देकर बेंच लिए जाते है। विकास खण्ड बनीकोडर ब्लाक के अन्तर्गत संचालित होने वाले आंगनबाडी केन्द्रो की जांच की कराई जाए तो सही हकीकत सामने आ जाएगी । आंगनबाडी केन्द्रो का यह आलम है कि रजिस्टरों में बच्चों की दर्जनों  की संख्या लिखी होती है लेकिन वास्तविकता यह है की आंगनबाडी केन्द्रों पर बच्चों की संख्या बहुत कम होती है पोषाहार बच्चों व गर्भवती महिलाओं को कभी कभार दिया जाता है यह पोषाहार बच्चों की जगह पशुआहार बन कर गया है बाल विकास परियोजना के कुछ आधिकरियों का ध्यान इधर कभी जाता ही नहीं इसका भी एक मूल कारण है टाप टू वाटम नीचे से अधिकारियों का कमीशन बंधा हुआ है यदि सुपरवाइजर जी पोषाहार उठाने के समय क्षेत्रीय सुपरवाइजर अपनी जेबे गरम करता है तो इसका मतलब यह नही की भ्रष्टाचार के सुपरवाइजर ही लिप्त हैं अन्य अधिकारी भी इसके जिम्मेदार हैं यदि जनता पोषाहार बांटने के शिलसिले में किसी भी आंगनबाडी़ कार्यकत्री की शिकायत करें तो कहां करेें। जांच वही करेगा जिसकी जेबे पहले से ही गरम रहती हैं। यदि अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं हैं । तो जांच कभी क्यों नही होती ।

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