शम्मये हुसैनियत का परवाना थे आरिफ मजलिसी: मौलाना अशफाक
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। खतीबे कर्बला आरिफ रजा मजलिसी की याद में कर्बला सिविल लाइन्स में आयोजित मजलिस को सम्बोधित करते हुये मौलाना मिर्जा मोहम्मद अशफाक ने कहा कि मौला अली फरमाते है दुनिया में ऐसी जिन्दगी गुजारो जब तक दुनिया में मौजूद रहो तुमको लोग तलाश करे और जब दुनिया से चले जाओ तो लोग तुम्हे याद करें। मौलाना अशफाक ने आगे कहा कि इंसान नही याद उसकी सिफात याद आती है। स्व. आरिफ रजा की शाइस्तगी, मिलनसार, तबियत, बन्दा जितना झुकता है अल्लाह उसका मर्तबा बलन्द करता है। स्व. आरिफ ने कर्बला को हयात का मरकज बनाया और उसको जो तन्हा था कर्बला में शम्मये हुसैनियत का परवाना थे आरिफ रजा मजलिसी। यही इंसानियत इस्लाम है। मौलाना ने कुरानेपाक की तिलावत से मजलिस की शुरुआत किया। उन्होने कहा कि कुरान में तौहीद रिसालत, नबुअत, इमामत, तहारत, जन्नत, कौसर, अम्ले खैर सब कुछ इसमें मौजूद है। लेकिन आज मुसलमान कुरान तो घर में रखते हैं लेकिन किताबों के चक्कर में पड़कर ठोकरे खा रहा है। जिसने अपने को पहचान लिया उसने अल्लाह को पहचान लिया। कुरान की हर आयत में अल्लाह की रहमत छुपी है। मौलाना अशफाक ने यह भी कहा कि आदम से लेकर खातम तक 1 लाख 24 हजार पैगम्बरों की दुनिया वालों ने मुखालिफत की। हर अच्छे इंसान की ये दुनिया मुखालिफत करती है। अन्त में मौलाना ने अलग अंदाज में कर्बला के दर्दनाक मसायब पेश किये। जिसे सुनकर अजादार रो पड़े। मजलिस से पूर्व मौलाना रजा मौरानवी ने कलाम पेश करते हुये कहा कोई तो कहता यजीद आके यहां बैअत मांग, हम भी देखे तेरी तलवार में दम कितना है। खुरशीद फतेहपुरी ने पढ़ा-फर्शे गमे हुसैन है घर में बिछा हुआ, सारी बहारे खुल्द हमारे चमन में है। औन जलाली ने मर्सिया पढ़ते हयुे कहा चहेल्लुम जो कर्बला में बहत्तर का हो चुका पेबन्द बेकसो का तनो सर का हो चुका। अजमल किन्तूरी ने पढ़ा- न खौफे मर्ग न जीना मुहाल होता है यही तो इश्के अली का कमाल होता है। बाकर बाराबंकवी ने पढ़ा-कर्बला की खाक सन् 61 से पहले खाक थी अब वो दुनिया के मरीजों के लिये अकसीर है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार रिजवान मुस्तफा , सांसद पीएल पुनिया, शाह अनवर जमाल, उमैर किदवाई, वित्तीय अल्पसंख्यक के डायरेक्टर इजहार हुसैन एडवोकेट, मौलाना इफ्तेखार हुसैन इंकलाबी, हुमायूं नईम खां, मौलाना मोहम्मद रजा जैदपुरी, मौलाना अता जैदपुरी, मौलाना सहबान, चचा अमीर हैदर एडवोकेट, डा. असद अब्बास, अतहर हुसैन एडवोकेट, डा. अली हम्माद, नय्यर जमाल, सलमान अशरफ, अनवर महबूब किदवाई, अन्जुम नासिर किदवाई, उबैद अहमद, कमाल फारुकी, इनायत उल्ला किदवाई, जहीर किदवाई के अलावा सैकड़ो मुहब्बाने अहलेबैत मौजूद थे। कार्यक्रम की समाप्ति पर आमिर रजा, वासिफ रजा, हुसैन रजा ‘‘रेनू‘‘ ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
बाराबंकी। खतीबे कर्बला आरिफ रजा मजलिसी की याद में कर्बला सिविल लाइन्स में आयोजित मजलिस को सम्बोधित करते हुये मौलाना मिर्जा मोहम्मद अशफाक ने कहा कि मौला अली फरमाते है दुनिया में ऐसी जिन्दगी गुजारो जब तक दुनिया में मौजूद रहो तुमको लोग तलाश करे और जब दुनिया से चले जाओ तो लोग तुम्हे याद करें। मौलाना अशफाक ने आगे कहा कि इंसान नही याद उसकी सिफात याद आती है। स्व. आरिफ रजा की शाइस्तगी, मिलनसार, तबियत, बन्दा जितना झुकता है अल्लाह उसका मर्तबा बलन्द करता है। स्व. आरिफ ने कर्बला को हयात का मरकज बनाया और उसको जो तन्हा था कर्बला में शम्मये हुसैनियत का परवाना थे आरिफ रजा मजलिसी। यही इंसानियत इस्लाम है। मौलाना ने कुरानेपाक की तिलावत से मजलिस की शुरुआत किया। उन्होने कहा कि कुरान में तौहीद रिसालत, नबुअत, इमामत, तहारत, जन्नत, कौसर, अम्ले खैर सब कुछ इसमें मौजूद है। लेकिन आज मुसलमान कुरान तो घर में रखते हैं लेकिन किताबों के चक्कर में पड़कर ठोकरे खा रहा है। जिसने अपने को पहचान लिया उसने अल्लाह को पहचान लिया। कुरान की हर आयत में अल्लाह की रहमत छुपी है। मौलाना अशफाक ने यह भी कहा कि आदम से लेकर खातम तक 1 लाख 24 हजार पैगम्बरों की दुनिया वालों ने मुखालिफत की। हर अच्छे इंसान की ये दुनिया मुखालिफत करती है। अन्त में मौलाना ने अलग अंदाज में कर्बला के दर्दनाक मसायब पेश किये। जिसे सुनकर अजादार रो पड़े। मजलिस से पूर्व मौलाना रजा मौरानवी ने कलाम पेश करते हुये कहा कोई तो कहता यजीद आके यहां बैअत मांग, हम भी देखे तेरी तलवार में दम कितना है। खुरशीद फतेहपुरी ने पढ़ा-फर्शे गमे हुसैन है घर में बिछा हुआ, सारी बहारे खुल्द हमारे चमन में है। औन जलाली ने मर्सिया पढ़ते हयुे कहा चहेल्लुम जो कर्बला में बहत्तर का हो चुका पेबन्द बेकसो का तनो सर का हो चुका। अजमल किन्तूरी ने पढ़ा- न खौफे मर्ग न जीना मुहाल होता है यही तो इश्के अली का कमाल होता है। बाकर बाराबंकवी ने पढ़ा-कर्बला की खाक सन् 61 से पहले खाक थी अब वो दुनिया के मरीजों के लिये अकसीर है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार रिजवान मुस्तफा , सांसद पीएल पुनिया, शाह अनवर जमाल, उमैर किदवाई, वित्तीय अल्पसंख्यक के डायरेक्टर इजहार हुसैन एडवोकेट, मौलाना इफ्तेखार हुसैन इंकलाबी, हुमायूं नईम खां, मौलाना मोहम्मद रजा जैदपुरी, मौलाना अता जैदपुरी, मौलाना सहबान, चचा अमीर हैदर एडवोकेट, डा. असद अब्बास, अतहर हुसैन एडवोकेट, डा. अली हम्माद, नय्यर जमाल, सलमान अशरफ, अनवर महबूब किदवाई, अन्जुम नासिर किदवाई, उबैद अहमद, कमाल फारुकी, इनायत उल्ला किदवाई, जहीर किदवाई के अलावा सैकड़ो मुहब्बाने अहलेबैत मौजूद थे। कार्यक्रम की समाप्ति पर आमिर रजा, वासिफ रजा, हुसैन रजा ‘‘रेनू‘‘ ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
