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इंकलाबी शायर कामिल की याद में गोष्ठी आयोजित

जौनपुर। नगर के शेख मोहामिद मोहल्ले में इंकलाबी शायर कामिल शफीकी की याद में डा. पीसी विश्वकर्मा की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसका शुभारम्भ सलमान मदनी ने शफीकी साहब की गजल ‘मुल्क और कौम का इतना भी न मेयार गिरे-सुर्खियां देखते ही हाथ से अखबार गिरे’ को पेश करके किया। तत्पश्चात् मोनिस जौनपुरी ने इखलाक व खुलूस कोई देखता नहीं, सब देखते हैं जिस पर कैसा लिबास है पढ़कर समाज का मनोवैज्ञानिक चित्रण पेश किया। इसके अलावा अरविन्द सिंह बेहोश जौनपुरी, याकूब नदीम, नासिर जौनपुरी, मुस्तईन जौनपुरी, काजी जिया, शहजाद जौनपुरी, कमल जौनपुरी सहित अन्य शायरों ने अपनी रचना प्रस्तुत करके वाहवाही लूटी। अन्त में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये डा. पीसी विश्वकर्मा ने ‘जिसका कोई जवाब हो न सका, तूने ऐसा मुझे सवाल किया’ पढ़ा। गोष्ठी का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। इस अवसर पर जमशेद अख्तर, डा. शाहिद, अरशद फारूकी, विनोद गुप्ता, मो. शाहिद, मोहन जायसवाल, हफीज शाह, महताब, अब्दुल मन्नान, शहनवाज के अलावा तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अन्त में प्रख्यात शायर आकिल जौनपुरी ने समस्त आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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