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...नहीं रहे उर्दू साहित्यकार चौधरी सिफवत अली

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। अजमत फाउण्डेशन सोसायटी के अध्यक्ष सितवत अली के अग्रज भाई प्रख्यात साहित्यकार चौधरी सिफवत अली का बीते दिनो हृदयगति रुकने से निधन हो गया। वह अमेरिका में रह रहे थे। निधन की खबर आते ही उनके ग्राम सराय मिही में शोक की लहर दौड़ गयी। वह 65 वर्ष के थे। अपने पीछे पत्नी, एक लड़का और तीन बेटियां छोड़ गए। चौधरी सिफवत अली ने लंदन से पीएचडी करके अमेरिका में कम्प्यूटर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हुए। उन्होने 1985 में अमेरिका से भारत आकर नई दिल्ली में एक कम्प्यूटर कम्पनी का उद्घाटन किया। वह एक खुश मिजाज और हर दिल अजीज व्यक्ति थे। यही नही वह उर्दू, अरबी, फारसी के साहित्यकार होने के साथ-साथ अच्छे शायर भी थे। उनकी कई किताबों का विमोचन लखनऊ में भी हुआ। स्व. सिफवत अली, मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के चेयरमैन रहे मौलाना अली मियां रह. अलै. व चौधरी अली मुबारक उस्मानी के करीबी दोस्तो में से थे। मौलाना अली मियां रह. अलै. के अमरीका जाने के सफरनामे में स्व. सिफवत अली का उल्लेख मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के चेयरमैन जनाब मौलाना राबे साहब ने किया है। उनके निधन से एक ओर जहां एक जिंदा दिल इंसान के जाने का दुख हुआ वहीं दूसरी ओर साहित्य जगत को भी भारी नुकसान हुआ। स्व. सिफवत अली का अमेरीका जाने के बाद भी उनका जनपद बाराबंकी से गहरा रिश्ता रहा। उन्हीं के मार्गदर्शन पर अपने पिता चौधरी अजमत अली की याद में अजमत फाउण्डेशन के माध्यम से उर्दू, अरबी, हिन्दी और अंग्रेजी की मुफ्त शिक्षा के लिए एक मदरसा तामील कराया गया। 

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