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बीमारियों से मुक्ति का केन्द्र बना प्राचीन मन्दिर


अजमी रिज़वी
जैदपुर बाराबंकी। ग्राम बीबीपुर में मॉ भगवती देवी दुर्गा का लगभग तीन सौ वर्ष पुराना मन्दिर लोगो की श्रद्धा का केन्द्र बिन्दु बना हुआ है। इस मन्दिर की स्थापना के बारे मे लोगो का मानना है कि सैकडो वर्ष पहले बाबा हरिहर दास गंगा स्नान के लिए इलाहाबाद गये हुए थे। स्नान करते समय उनके पैर मे ठोकर लगी तो देखा कि नीचे देवी दुर्गा की मूर्ति पडी थी। सम्यक ज्ञान व दर्शन द्वारा देवी ने बाबा को अवगत कराया कि यह मूर्ति आप जहॉ रास्ते मे रख देगे वही पर इसकी स्थापना मानी जायेगी। बाबा कॉवर लेकर वहॉ से चले अनावरत चलने के बाद ग्राम बीबीपुर पहुॅचे और मूर्ति रखकर आराम करने लगे वह मूर्ति दोबारा वहॉ से न उठा पाये और वही पर एक मन्दिर की स्थापना का कार्य शुरू हो गया। देवी मॉ की अनुकम्पा से इस मन्दिर की पुनरोत्थान व नवीनीकरण का श्रेय गोपी नाथ जी को जाता है। गोपी नाथ जी एक विद्वान व प्रतिभाशाली व्यक्ति है। इन्होंने अनेक रचनाए भी की है। इस मन्दिर की विशालता एवम भव्यता वर्णन से परे है। प्रत्येक वर्ष अषाढ मास के प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को मेले का आयोजन होता है और नवरात्रिे के अवसर पर मन्दिर की छटा देखते ही बनती है। इस मन्दिर मे माता दुर्गा के साथ साथ लगभग सभी देवी देवताओ की मूर्तिया लोगो के विशवास के कारण उनकी मॉगी हुई मुरादे पूरी होती है। इसी मन्दिर के दक्षिण भाग मे कौरहापुरवा मे प्रसिदध कॉवर कूप है। जिसके जल से पीलिया रोग दूर हो जाता है। मंगल व रविवार को हजारो पीलिया के रोगी यहॉ आकर इसका जल ग्रहण करते और स्नान करके स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते है। सभी धर्मो के लोग भारी संख्या में लोग दूर दूर से लोग आकर स्नान करते हैं। और अनेक बीमारियों से मुक्ति प्राप्त करते हैं।

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