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सड़को पर उतरे सैकड़ो मुसलमान, प्रशासन परेशान

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा के तत्वाधान में जिला स्तर पर गुस्ताख़-ए-रसूल कमलेश तिवारी के विरोध में एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिसकी क़यादत क़ाजी़-ए- शहर हज़रत मौलाना अब्दुल मुस्तफा हशमती (राष्ट्रीय सचिव; जमात रज़ा-ए-मुस्तफा) ने की। प्रदर्शनकारी सैकड़ो की तादाद में जुलूस लेकर पैदल शहर की सड़को से होते हुए कलक्टेªट पहुंचे जहां जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। फ़ज़्लुर्रहमान पार्क में सुबह से पूरे जिले के आशिक़ान-ए-रसूल जमा होना शुरू हो गए। ठीक 10 बजे मौलाना कारी मो0 अलीम क़ादरी ने तिलावत-ए-कुरान से प्रोग्राम की शुरूआत की। क़ारी मो0 फरीद रज़ा ने प्रोग्राम का संचालन किया। पूरे जिले से आये हुये उलमा-ए-किराम (नायब काजी-ए-शहर मुफ़्ती इश्तिायाक़ रजवी; मौलाना ज़ाहिद अली निज़ामी; मुफ्ती मो. कलीम नूरी; मुफ्ती अतीक मिस्बाही सक़ाफ़ी; मौलाना अख़्तर हुसैन कादरी; मौलाना मसूद अहमद; मौलाना मोहम्मद शफ़ीक रज़वी; कारी अबुल कलाम बुरहानी; मौलाना अहमद अली क़ादरी बॉसवी; मौलाना शमीम रज़ा ने गुस्ताख़-ए-रसूल के खिलाफ अपने गम व गुस्से का इज़हार किया। क़ाजी़-ए-शहर मौलाना अब्दुल मुस्तफ़ा हशमती ने सम्बोधित करते हुए कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) की ज़ाहिरी ज़िन्दगी में जब-जब किसी व्यक्ति (चाहे वह किसी भी धर्म का रहा हो) ने गुस्ताख़ी की तो सहाबा-ए-किराम ने उस गुस्ताख़ का सर कलम कर दिया। इसके बाद भी इस्लामी हुकुमतो मे गुस्ताख़-ए-रसूल का सर कलम किया जाता रहा। अभी एक दिसम्बर 2015 को हिन्दू महासभा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष आतंकवादी कमलेश तिवारी ने पैगम्बर-ए-इस्लाम (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) की शान मे ऐसी गुस्ताखी की; जिससे हिन्दुस्तान के मुसलमानों में आक्रोश व्याप्त है। मुसलमानों के आक्रोश को ठण्डा करने के लिए आतंकवादी कमलेश तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मगर केन्द्र सरकार व राज्य सरकार ने जैसा दण्ड दिया जाना चाहिए उसकी कोई व्यवस्था नही की। इसलिए हम हुकूमत से मांग करते है कि आतंकवादी कमलेश तिवारी के खिलाफ ’’रासुका’’ के साथ देशद्रोह का मुक़दमा चलाकर फंासी दी जाए। यदि ऐसा नही होता है और कोई भी मुसलमान कानून को अपने हाथ में लेता है तो मुल्क में अमन व शान्ति भंग होगी। जुलूस फ़ज़्लुर्रहमान पार्क से घंटाघर; धनोखर; निबलेट तिराहा; बेगमगंज; कोतवाली हेाते हुए कलेक्ट्रेट में जाकर एक सभा में परिवर्तित हो गया। जहांॅ जिलाधिकारी को जमात रज़ा-ए- मुस्तफ़ा के पदाधिकारियों द्वारा एक ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर क़ाज़ी सैय्यद सईद अहमद रज़्ज़ाकी; हाजी अलाउद्दीन अंसारी; उसामा अंसारी; हाफ़िज इशरत अली अंसारी; इजलाल क़िदवाई; आफ़ाक़ अहमद (इफ़्फ़ू मियां); मसूद अख़्तर; सैय्यद आफ़ाक़ अहमद एडवोकेट; जावेद मलिक एडवोकेट सहित सैकड़ो मुसलमान मौजूद थे। 

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