मधुमेह व तनाव का इलाज प्राकृतिक वनस्पतियों से संभवः मौर्या
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जौनपुर। केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डा. राकेश मौर्या ने कहा कि तनाव, मधुमेह, हड्डी क्षीणता आदि रोगों का निदान प्राकृतिक वनस्पतियों से संभव है। आज समाज का हर तीसरा व्यक्ति इन बीमारियों से पीडि़त है। वे आज वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 19वें दीक्षांत समारोह के पूर्व व्याख्यानमाला के तहत संगोष्ठी भवन में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में आज बहुत से लोग हड्डी, मधुमेह और तनाव से पीडि़त हैं। बाजार में इसकी दवाएं विभिन्न कम्पनियों की आ रही है और लोग इस्तेमाल भी कर रहे है, इसका शरीर पर दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है, जिसके कारण अन्य कई बीमारियां इजाद हो जा रही है। हम इन बीमारियों का निवारण प्राकृतिक पौधे और पदार्थ से मिली दवाओं से कर सकते है, जिसका दुष्प्रभाव शून्य है। इसे सीडीआरआई के वैज्ञानिकों ने अपनी खोज में साबित किया है।
उन्होंने कहा कि हमारी टीम ने आयुर्वेदिक, चरक संहिता, यूनानी सिस्टम, सिद्धा एवं चाइनीज पद्धतियों का अध्ययन करने के बाद अपने देश के 93 वनस्पतिकीय पौधों पर अध्ययन किया। डा. मौर्या ने कहा कि आज समाज फिर पुराने आयुर्वेदिक पद्धति की ओर लौट रहा है। उन्होंने कहा कि आज 30 वर्ष के बाद मनुष्य में आस्टोब्लास्ट की समस्या होती है। 30 से 50 की उम्र में हड्डी के क्षरण और बढ़ने की समस्या होती है। इस समस्या का निदान ढाक के पौधे से बनी दवा से किया जा रहा है। इससे मनुष्य शरीर में पैर, घुटने और अन्य दर्द में इस्तेमाल कर लाभ उठा सकता है। उनका मानना है कि रोग को ठीक करने के लिए पौधों की पहचान करके ही उपयोग करें।
इसके पूर्व मुख्य अतिथि डा. राकेश मौर्या को पुष्पगुच्छ देकर प्रो. डीडी दूबे, डा. एके श्रीवास्तव ने स्वागत किया। परिचय, स्वागत एवं संचालन संयोजक डा. अजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डा. एच.सी. पुरोहित, डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. आलोक गुप्ता, पंकज सिंह, सुशील कुमार, नृपेन्द्र सिंह, विनय वर्मा, झांसी मिश्रा, पूजा सक्सेना, डा. राजीव कुमार, धर्मेन्द्र कुमार, आलोक दास आदि सहित सभी संकायों के विद्यार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डा. बीडी शर्मा ने किया।
उन्होंने कहा कि हमारी टीम ने आयुर्वेदिक, चरक संहिता, यूनानी सिस्टम, सिद्धा एवं चाइनीज पद्धतियों का अध्ययन करने के बाद अपने देश के 93 वनस्पतिकीय पौधों पर अध्ययन किया। डा. मौर्या ने कहा कि आज समाज फिर पुराने आयुर्वेदिक पद्धति की ओर लौट रहा है। उन्होंने कहा कि आज 30 वर्ष के बाद मनुष्य में आस्टोब्लास्ट की समस्या होती है। 30 से 50 की उम्र में हड्डी के क्षरण और बढ़ने की समस्या होती है। इस समस्या का निदान ढाक के पौधे से बनी दवा से किया जा रहा है। इससे मनुष्य शरीर में पैर, घुटने और अन्य दर्द में इस्तेमाल कर लाभ उठा सकता है। उनका मानना है कि रोग को ठीक करने के लिए पौधों की पहचान करके ही उपयोग करें।
इसके पूर्व मुख्य अतिथि डा. राकेश मौर्या को पुष्पगुच्छ देकर प्रो. डीडी दूबे, डा. एके श्रीवास्तव ने स्वागत किया। परिचय, स्वागत एवं संचालन संयोजक डा. अजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डा. एच.सी. पुरोहित, डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. आलोक गुप्ता, पंकज सिंह, सुशील कुमार, नृपेन्द्र सिंह, विनय वर्मा, झांसी मिश्रा, पूजा सक्सेना, डा. राजीव कुमार, धर्मेन्द्र कुमार, आलोक दास आदि सहित सभी संकायों के विद्यार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डा. बीडी शर्मा ने किया।
