aajtaktimes

मजलिस में कर्बला के मसायब सुनकर रो पड़े अज़ादार


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। कर्बला सिविल लाइन्स में मरहूम इंजीनियर नासिर अब्बास की ईसाले सवाब की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना इब्ने हैदर ने कहा बन्दा बन्दगी भूल सकता है लेकिन रब रबूबियत नही भूलता, मौलाना ने यह भी कहा जब दुनियां में कुछ न होगा तब भी खुदा के नूर के दो टुकड़े होगे जो अपने-अपने दुश्मनों को चुन-चुन कर जहन्नम में डाल रहे होगे वह कोई और नही एक ही नूर के दो टुकड़े ’’मोहम्मद स.व. व अली (अ.) होंगे। अन्त में कर्बला वालो के मसायब पेश किये जिसे सुन कर मोमनीन रो पड़े मजलिस से पूर्व डा. रज़ा मौरान्बी ने पढ़ा- परत बेकार है अब पत्थरों की दौरे हाज़िर में, कोई मोटी निकलना और न नीलम निकलता है। वफादारी की उम्मीदें न कीजे बेवफाओं से, कही नाली के कीड़ो से रज़ा रेशम निकलता है। इफ़हाम उतरौलवी ने पढ़ा- हम कभी अलकायदा का साथ दे सकते  नहीं, हमने बचपन से पढ़ा है क़ायदा सज्जाद का। अजमल किन्तूरी ने पढ़ा- हयात फातहे बदरो हुनैन से मांगो, नजात फातिमा ज़हरा के चैन से मांगो। बाकर नकवी ने पढ़ा- मेरे ओठो पे जो आई तेरी मिदहत सज्जाद, यूं लगा जैसे हो कुरआं की तिलावत सज्जाद। मजलिस का आग़ाज औन उन्नावी ने सोज़ख्वानी से किया, बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

Related

UP 1913256826860389152

Post a Comment

emo-but-icon

Recent

Comments

item