संसद में उठाया पदोन्नति आरक्षण का मुद्दा
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया ने संसद में नियम 180 (क) के अन्तर्गत विशेष उल्लेख के दौरान चर्चा करते हुए पदोन्नति में आरक्षण एवं परिणामी ज्येष्ठता की व्यवस्था संवैधानिक बनाने का मुद्दा उठाया।
श्री पुनिया ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 28 अप्रैल 2012 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। साथ ही 15 नवंबर 1997 के बाद प्रमोशन में आरक्षण और परिमाणी ज्येष्ठता के आधार पर पदोन्नति पाने वाले कर्मियों को रिवर्ट करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए 2012 में केन्द्र सरकार 117वें संविधान संशोधन का प्रस्ताव लाई। इसमें संविधान के अनुच्छेद 16 (4)(ए) जोडने का प्रस्ताव किया गया। अनुच्छेद 335 राज्यों को ऐसा कोई कानून बनाने से नहीं रोकेगा, जिसमें वह एससी-एसटी को प्रमोशन में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता का लाभ देना चाहते हों। श्री पुनिया ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा लगभग 15000 कर्मियों को पदावनत कर दिया। कर्मियों को प्राप्त हो रही परिलब्धियों के आधार पर वरिष्ठता क्रम का कोई लाभ नहीं होगा। पदावनत होने पर मौजूदा वेतन एवं नए पद के वेतन के अंतर के बराबर वैयक्तिक वेतन तो दिया जाएगा परन्तु इसकी गणना पेंशन और कटौती के संदर्भ में नहीं की जाएगी। एक ओर पदावनति से हजारों पद खाली हो गए हैं वहीं दूसरी ओर आज भी आरक्षित वर्ग के पदोन्नति के लाखों पद खाली पडे हुए हैं।


