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स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्णः ममता

जौनपुर। बचपन से ही बच्चों को योग की संस्कारशाला में संस्कारित करके एक शिक्षक स्वयं के साथ स्वस्थ समाज व राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है, इसलिये प्रत्येक शिक्षक के साथ प्रत्येक बच्चों को नियमित व निरन्तर यथाशक्ति धीरे-धीरे योग के क्रियात्मक व सैद्धांतिक अभ्यासों को करना चाहिये। उक्त बातें ब्लाक संसाधन केन्द्र धर्मापुर में शिक्षकों के लिये आयोजित योग प्रशिक्षण शिविर में खण्ड शिक्षा अधिकारी सुश्री ममता सरकार नें कहीं। योग के क्रियात्मक व सैद्धांतिक अभ्यासों को पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी अचल हरिमूर्ति ने कराते हुये बताया कि स्वस्थ व्यक्ति के लिये योग एक साधना पद्धति है जबकि बीमार व्यक्ति के लिये उच्च कोटि की चिकित्सा पद्धति है जिसे नियमित व निरन्तर अपनाकर आने वाली पीढ़ियों को संस्कारवान बनाया जा सकता है। योग के क्रियात्मक अभ्यासों के क्रम में शिक्षकों को योगिंग, जागिंग, सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, वृक्षासन, मकरासन, भुजंगासन, मर्कटासनों सहित भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, वाह्य प्राणायाम, अग्निसार, नौलिक्रिया, भ्रामरी व उद्गीथ प्राणायामों के साथ योग निद्रा व ध्यान की विशेष प्रक्रियाओं का अभ्यास कराते हुये उनसे मनःस्थिति पर पड़ने वाले प्रभावों को भी बताया गया। इस अवसर पर लाल बहादुर, कमलेश कुमार, महेंद्र प्रताप, अजय मौर्य, धर्मेंद्र यादव, सत्य प्रकाश पाण्डेय मौजूद रहे।

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