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रंग बरसे झमाझम फागुन में


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। अवध एवं बृज की होली पर आधारित ‘रंग बरसे झमाझम फागुन में’’
सास्कृतिक का आयोजन नगर पालिका परिषद् में कण्ड कोकिला संगीत संस्थान
द्वारा आयोजन किया गया। कुल गुरू प्रवणानन्द सरस्वती जी के चरण वन्दन में
प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में होली में गाये जाने पारम्परिक धुनों गीतों
की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शक समूह को बारम्बार प्रफुल्लित हो वाह
कहने को मजबूर करती रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री खेल एवं
युवा कल्याण रामकरन आर्य ने अपने सम्बोधन में कहा कि वैश्विकता के युग
में सांस्कृतियों की घाल मेल हो रही है ऐसे में अपनी संस्कृति का संरक्षण
राष्ट्रीय कर्तव्य होता है। श्री आर्य ने आयोजक संस्था व संयोजिका
प्रियंका पाण्डेय की प्रशंसाा करते हुए कहा कि ‘रसिया को नारि बनाओरी
रसिया को’’ गीत ने जहां खूब तालियां बटोरी वहीं प्रियंका पाण्डेय द्वारा
प्रस्तुत गीत ‘‘मो पे रंग ना डारो मुरारी’’ पर लोग झूम उठे। अवध होरी के
गीतों ने भी धूम मचा दी। जिसमें ‘‘अवध नगरिया छाईरे बहरिया कि भल रंग
खेले होरी चारिऊ भइया’’ जी ने समा बांधी तो अन्त तक दर्शक बंधे रहे।
समाजसेवी प्रदीप सारंग द्वारा संचालित कार्यक्रम में युवा कल्याण के खेल
राज्य मंत्री रामकरन आर्य द्वारा यश भारती पुरस्कार प्राप्त प्रोफेसर
कमला श्रीवास्तव, योगेश प्रवीण श्रीमती विमल पंत व सिटी इण्टर कालेज के
प्रिंसिपल श्री राम निवास द्विवेदी ‘‘नाना को अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह
देकर संस्था की ओर से सम्मानित किया था। कार्य का शुभारम्भ में संस्था के
सचिव अजय प्रताप सिंह ने सभी का स्वागत किया और रामनिवास द्विवेदी द्वारा
रचित पुस्तक गीत तरगिणी का विमोचन गुरूजी प्रणवानन्द सरस्वती जी के
करकमलों द्वारा किया गया।

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