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लोकतंत्र रक्षक संघर्ष के स्वर्णिम इतिहास भुलाया नही जा सकता: अशोक


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। स्वाधीनता संग्राम के पश्चात लोकतन्त्र रक्षक संघर्ष भारतीय इतिहास का वह स्वर्षिम पृष्ठ है जिसे कभी भी भुलाया नही जा सकेगा। उपरोक्त विचार स्थानीय जिला पंचायत सभागार मंे लोकतंत्र रक्षक सेनानी सम्मेलन के मुख्य अतिथि अशोक सिंह अध्यक्ष जिला पंचायत ने व्यक्त किये। श्री सिंह ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश और विशेष कर बाराबंकी संघर्ष की धरती है जो कि रचनात्मकता के सभी आयामों मंे अग्रणी रही है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए लोकतन्त्र रक्षक सेनानी कल्याण परिषद के अध्यक्ष डॉ. भगवान वत्स से कहा कि आपाल काल आजाद भारत के इतिहास का काला अध्याय हैै। लोकतन्त्र की बहाली के लिए संघर्ष करने वालो का लोक तन्त्र रक्षक सेनानी सम्मन और सुविधाएँ देकर प्रदेश की समाजवादी सरकार ने सराहनीय कार्य किया है। सम्मेलन को कोआपरेटिंव बैंक के चेयर मैंन धीरेन्द्र वर्मा ने सम्बोधित करते कहा कि जिन मूल अधिकारों की रक्षा हेतु लोक तन्त्र सेनानियों ने प्रताड़नाएं झेली है उनकी रक्षा संरक्षा हेतु युवा पीढ़ी को सदैव सजग रहना होगा। जिला संयोजक अजय सिंह के संचालन मंे सम्पन्न सम्मेलन मंे डॉ. आरडी यादव, हरीराम यादव, स्वामी दयाल मौर्य, प्रदीप सारंग, राम समुझ वर्मा, केके द्विवेदी, डॉ. सुविद्या वत्स, डॉ. श्याम सुन्दर दीक्षित ने भी विचार व्यक्त किये। सम्मेलन के अन्त मंे सर्वसम्मति से लोक तेन्त्र सेनानियों विषयक अधिनियम परित करने हेतु मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को धन्यवाद प्रस्ताव प्रेषित किया गया। सम्मेलन मंे आपात काल के दौरान भूमिगत होकर कार्य करने हेतु एड. स्वामी दयाल मौर्य तथा स्व. जयन्ती प्रसाद दीक्षित की धर्म पत्नी को अंग वस्त, स्मृति चिन्ह आदि भेटकर सम्मानित किया गया। जयप्रकाश नारायण के क्रान्ति गीत से आरम्भ होकर लगभग 3 घण्टे चले इस सम्मेलन मंे अध्यक्ष जिला पंचायत अशोक सिंह सम्पूर्णता तक उपस्थित रहे।

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