आरटीआई का जवाब देने से कतरा रहा बीएसएनएल विभाग
https://husainijnp.blogspot.com/2016/04/blog-post_347.html
अजमी रिज़वी
रामसनेहीघाट बाराबंकी। दूरसंचार विभाग बाराबंकी के अधिकारियों के लिए
जनसूचना अधिकार अधिनियम कोई मायने नही रखता क्योंकि उनके द्वारा सूचना
मांगी जाने वाले आवेदन को न केवल लटकाया जाता है बल्कि मांगी गयी सूचनाये
देने में भी आनाकानी की जा रही है। ऐसा ही मामला भारत संचार निगम
बाराबंकी में सामने आया है। रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र के तिवारीपुर गांव
निवासी इन्द्र प्रताप सिंह ने गत वर्ष 29 अगस्त को जनसूचना अधिकार के तहत
भारत सरकार संचार निगम बाराबंकी के जिला प्रबंधक केा नियामानुसार पत्र
भेज कर दूरभाष केन्द्रो व बीटीएस मोबाइल टावरों पर डीजल एवं इस दौरान
मिली बिजली के साथ वर्तमान में संविदा पर चल रहे वाहनों की जानकारी मांगी
गयी थी विभाग द्वारा इस आवेदन पत्र व पोर्स्टल आर्डर पर यह कहकर वापस
लौटा दिया कि पोर्स्टल आर्डर लेखाधिकारी के नाम न बनवाकर सूचना अधिकारी
/प्रबंधक के नाम बनवा दिया है । इसके बाद इन्द्रप्रताप सिंह ने 7 सितम्बर
2015 को दूसरा पत्र भेजा गया जिसका पेार्स्टल आर्डर लेखा अधिकारी के नाम
बनवाया गया जिला प्रबंधक द्वारा इस पत्र को यह कहकर वापस कर दिया गया कि
आवेदन पत्र के साथ पोर्स्टल आर्डर नही लगा है जबकि सूचना मांगने वाले
इन्द्र प्रताप सिंह ने पोर्स्टल आर्डर की संख्या आवेदन पर लिख रखी थी ।
इस पत्र के जबाब में श्री सिंह ने 11 फरवरी 2016 को पोर्स्टल आर्डर
मंागवाकर आवेदन भेजा लेकिन इस बार भी समय सीमा के अन्दर कोई सूचना नही
उपलब्ध कराई गयी और नही कोई आपत्ति की गयी । समय सीमा बीतने के बाद जिला
प्रबंधक ने एक और धोखाधड़ी करके पीड़ित को गुमराह करने की कोशिश की । 2
अप्रैल 2016 को इन्द्र प्रताप सिंह को एक रजिस्टर्ड पत्र मिला जो दस
मार्च को लिखा गया था इस रजिस्टर्ड डाक को रामसनेहीघाट से तिवारीपुर
पहुंचने में करीब 20 दिनों का समय लग गया । आश्चर्य तो इस बात का है कि
पत्र के साथ एक सवाल का जबाब संलग्न करने की बात कही गयी किंतु उसके साथ
कुछ भी संलग्न नही था इन्द्रप्रताप सिंह का कहना हैै कि विभाग अपने
भ्रष्ट्राचार को छिपाने के लिए न केवल झूठ बोलकर परेशान किया जा रहा है
बल्कि जनसूचना अधिकार के नियमों का खुला उल्लंघन भी विभाग कर रहा है।

