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आधुनिकता के दौर में खतरे में पड़ा कुओं का अस्तित्व


अजमी रिज़वी 
बाराबंकी। आधुनिकता के इस दौर में भले ही हैंड पम्पो की झुंड में कुंओं का अस्तित्व लगभग समाप्त हो रहा होए लेकिन आज भी तहसील क्षेत्र के कुछ गांव ऐसे है जहां के निवासी कुंओं के पानी से ही अपनी प्यास बुझा रहे है। बताते चले की आधुनिकता के दौर का चक्र कुछ ऐसा घूमा कि पुरानी परम्परायें व पुरानी पहचान लगभग मिटने के कगार पर पहुंच गई है। अगर देखा जाये तो चाहे जिस दिशा पर नजर डाली जाय हर ओर आधुनिकता के रंग में सारी पुरानी परम्परायें रंगती नजर आयेगी। अभी थोडे समय पहले गांवो में कुओं के अलावा वैसे ही कोई गांव रहाहोगा जहां पर एक दो हैंड पम्प लगे रहे होंगें। गांवो के लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए कुओं का ही सहारे लेते है। ग्रामीण कुओं पर गडारी लगाकर पानी भरता था। लेकिन अधुनिकता का चक्र कुछ ऐसे घूमा की कुओं का अस्तित्व ही खतरे में पड गया और हर गांव में घर घर हैंड पम्प लगने लगे। घर में लगें हैंड पम्पो के बाद भी काफी हद तकलोग कुओं का ही सहारा लेते थे लेकिन इंडिया मार्का हैंड पम्प की लत में ग्रामीण ऐसे रमें की कुओं का अस्तित्व पूरी तरह से खतरे में पड गया। लेकिन आज भी कई गांव ऐसे है जहां पर अभी भी कुओं का ही सहारा ग्रामीणों के सामने है। तहसील रामसनेहीघाट क्षेत्र के लोहिया गांव में करीब एक दर्जन परिवार ऐसे जो हैंड पम्प न लगा होने के कारण आज भी भी कुओं का पानी पी रहे है। यही नही इस गांव में इंडिया मार्का हैंड पम्प तो लगे है लेकिन ग्रामीण हैंड पम्पो के साथ कुआ के पानी का भी स्वाद ले रहे है। इस गांव में दर्जनो हैंड पम्प लगे है लेकिन उसमें से एक तिहारी हैंड पम्प छोटी मोटी खराबी के चलते लोगो को सुचारू रूप् से पानी नही उपलब्ध करा पा रहे है। गांव केगिरधारी लाल साहू के दरवाजे पर मौजूद कुआ आज भी दर्जनो लोगो की प्यास बुझाने का एक मात्र साधन है। कुआ के थोडी दूर पर इंडियामार्का हैंड पम्प तो लगा है लेकिन वह काफी दिनो से खराब चल रहा है जिससे लोगो के सामने पानी पीने का एक मात्र साधन गिरधारी के दरवाजे पर स्थित कुआ ही है। यही नही ग्रामीणों का शासन के कृषिराज्य मंत्री पर भी आरोप मढने से पीछे नही रहे ग्रामीणों ने बताया कि जहां पर पानी पीने के ज्यादा समस्या थी वहां पर मंत्री के द्वारा लगवाये गये हैंड पम्प नही लगे है मनमाने तरीके से हैण्ड पम्पो को लगवाया गया है कई ग्रामीणों का कहना है कि टडिया में अगर गिरधारी लाल के घर के आस पास एक हैंडपम्प लग जाता तो दर्जनो घरो केपरिवारो की प्यास बुझती लेकिन मंत्री के कारिंदो ने ऐसा नही किया। और पानी पीने का मात्र कुआ ही सहारा है। तत्कालीन जिलाधिकारी मिनिस्ती एस ने कुओ का अस्तित्व खतरे में देख खराब पडी कुओ को ठीक कराने का अभियान चलाया था लेकिन शायद उनका भी अभियान कुछ खास असर नही कर सका और उनका अभियान शायद समाप्ति की ओर है।

पुण्य कमाने के लिए बनवाते थे कुऐंए बावली एवं सराय


बाराबंकी। एक समय था जब राजा महाराजा सेठ साहूकार कुओं एवं बावलीकुओं को खुदवा कर पुंण्य कमाने एवं लोगो को लाभ देने के लिए तमाम रूपये खर्च करतें थे तथा गर्मी के मौसम में प्याऊ लगवाकर चिलचिलाती धूप में लोगो की प्यास बुझाते थे लेकिन हैंड पम्पो एवं जेट पम्पो के कारण कुओं और बावलियों पर खतरे के बादलमडराने लगे। धीरे धीरे साफ सफाई के आभाव में कुओं का अस्तित्व समाप्त हो गया है। थोडें समय पहले बनीकोडर क्षेत्र में अमूनन एक हजार कुआं रही होंगी तों मौजूदा समय में उनकी संख्या घटकर एक दर्जन में ही सिमट गई है तत्कालीन जिलाधिकारी मिनिस्ती एस ने अपने कार्य काल में कुओं की साफ सफाई एवं कुओं का पानी पीकरलोगो कुओं की सुरक्षा करने की अपील की थी लेकिन उनका यह अभियान भी कोई खास असर नही कर सका।

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