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भगवान श्रीराम की आस्था को ठेस पहुचा रहे राजनेता : राजनाथ


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास . विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पत्र भेजकर यह जानना चाहा है कि आखिर वह किस भगवान श्रीराम की परिकल्पना करते हैं। वह महर्षि बाल्मीकि के रामए तुलसी के रामए रहीम के रामए गांधी के राम और लोहिया के राम की परिकल्पना करते है या फिर ऐसे श्रीराम की परिकल्पना करते हैए जिन भगवान श्रीराम व उनके भाईयों की ष्नारष् ;गर्भ रज्जुद्ध अयोध्या में स्थापित ष्सवर कक्षष् अर्थात ष्गर्भ गृहष् में गड़ी है।
श्री शर्मा ने बताया कि महाकवि तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के बाल काण्ड में भगवान श्रीराम के विराट स्वरूप का वर्णन किया गया है। राजा दशरथ की पत्नी एवं मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम की मां कौशल्या के कथनों का उल्लेख करते हुए गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि ष्ष्माता पुनि बोलीए सो मति डोली, तजहु तात यह रूपा। कीजै सिसुलीला. अति प्रियसीलाए यह सुख परम अनूपा। सुनि बचन सुजाना, रोदन ठानाए होइ बालक सुरभूपा। यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं, ते न परहिं भवकूपा। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भगवान विष्णु के अवतार हैं। उनके चरित्र और दर्शन को गिराने का काम कुछ हिन्दू संगठनए कुछ विकृत मानसिकता के हिन्दू धर्मावलम्बी एवं तथाकथित साधु.संत लगातार करते चले आ रहे हैं। जबकि भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व को मर्यादा पुरूषोत्तम के रूप में कई बड़े ऋषियों महन्तों दार्शनिकों एवं विद्वानों ने परिभाषित किया है।
श्री शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम हिन्दुओं के पूज्य हैं। मर्यादा पुरूषोत्तम हैं। आदर्श पुरूष हैं। सत्य प्रिय हैं। उन्होनें जोर देकर कहा कि भगवान श्री राम सनातन धर्म के अंग हैं न कि राजनीति के। ऐसे में भगवान के अवतार पर विवादित टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है। सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायियों की मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के प्रति आस्था व मनोभावों को अपने राजनैतिक लाभ के चलते ठेस पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

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