
जौनपुर। भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुके केराकत तहसील में सब कुछ संभव हो सकता है जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती है। बशर्ते भरपूर ढंग से जेब ढीली करने को कोई तैयार हो। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है जिसे सुनकर सभी हैरान हो जायेंगे। मालूम हो कि स्थानीय कस्बा निवासी पत्रकार कौशलेन्द्र गिरि की जमीन का बड़े ही शातिराना अंदाज में तहसील कर्मियों की साठ-गांठ से दूसरे के नाम वरासत कर दिया गया जिसकी जानकारी होने पर होश उड़ गये। मजे की बात यह है कि इतने सबके बाद भी साजिशकर्ताओं के हौंसले बुलंद देखे जा रहे हैं जो अब भूमि को बेचने की फिराक में लगे हैं। जानकारी होने पर पत्रकार ने शासन-प्रशासन से फरियाद करते हुये न्याय की गुहार लगायी है। आरोप है कि श्री गिरि के नाम 1990 में उक्त भूमि का सरकारी कायदा कानून के तहत वरासत हुआ था जिसे जुलाई 2015 में तहसीलकर्मियों की मिलीभगत तथा एक भूमि दलाल के माध्यम से एक महिला के नाम से वरासत कर दिया गया है। इसकी जानकारी होने पर पीड़ित ने तहसील प्रशासन से गुहार लगायी तो उसकी शिकायत को रद्दी की टोकरी में डालकर इस मामले में साजिश रचनी शुरू कर दी गयी। मजे की बात यह है कि वरासत की भनक तक पीड़ित को लगने नहीं दी गयी और न ही कोई सूचना दी गयी। इस प्रकार से देखा जाय तो एकपक्षीय कार्यवाही करते हुये सब कुछ गुपचुप ढंग से कराया गया। इस मामले में जहां स्वयं साजिश का खुलासा होता है। वहीं यह भी सवाल उठता है कि आखिरकार मामले की सूचना क्यों नहीं पत्रकार को दी गयी। क्यों इतने गुपचुप ढंग से कार्यवाही की गयी जबकि होना यह चाहिये था कि वरासत की जानकारी उक्त व्यक्ति को भी दी जानी चाहिये थी जिसके नाम वह भूमि पूर्व में वरासत की गयी थी। पीड़ित पत्रकार ने इस मामले में तहसील प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुये आरोप लगाया है। इस मामले में एक भूमि दलाल सहित उन्हीं के ही मोहल्ले के कुछ लोगों की जहां भूमिका रही है, वहीं उनके दो रिश्तेदारों की मिलीभगत और संलिप्तता है जिनसे उन्हें जानमाल का भी खतरा बना हुआ है।