मिट्टी का ‘‘तबादला‘‘ बदस्तूर जारी, नौकरशाह अंजान....?
https://husainijnp.blogspot.com/2016/04/blog-post_793.html
अजमी रिज़वी / आसिफ हुसैन
खनन माफिया पर खादी का वरदहस्त, खाकी मौन
सीडीओ आवास के सामने हो रही अवैध मिट्टी की पटाई
बाराबंकी। जनाब, कभी सुना है कि मिट्टी का भी तबादला होता है। रसूख के दम
पर रुतबा बुलंद किया जाता है और मिट्टी का भी तबादला कर दिया जाता है।
सत्ता की हनक के आगे सब बेकार। नौकरशाहों की हिम्मत ही क्या जो चूँ कर
दें। चाहें खाकी हो या मिट्टी खादी जब चाहे जिसे चाहे जहां चाहे भेज दे।
क्या मजाल कोई इंकार कर दे। सूबा राजधानी का सबसे करीबी बाराबंकी सबसे
ज्यादा खादी की गिरफ्त में है। कोई जरुरी नही कि सत्ता के गलियारे में
लालबत्ती से चलने वाला कोई खद्दरधारी हो। जनाब, यहां के जन प्रतिनिधि भी
खुद को सीएम से कम नही समझते। बस एक टैग ही तो लगना है। वो भी लगा लगाया
है। खनन माफियाओं को ऐेसे ही एक खादी की सरपरस्ती मिली हुई है। कोतवाली
नगर और थाना सतरिख की जुगलबंदी कहें या फिर खादी का दोनो जगह उम्दा दबाव,
मिट्टी का ट्रांसफर भी हो रहा है। वो भी किसी ऐसे वैसे प्लाट में नही।
मुख्य विकास अधिकारी के बंगले के ठीक सामने अवैध खनन की जाने वाली मिट्टी
रातो-रात डम्फरों से थाना सतरिख क्षेत्र से यहां लायी जा रही है। इसके
लिये भी कोई खास क्षेत्र बटा नही है। थाना सतरिख के ग्राम सरांय अकबराबाद
सहित कई अन्य क्षेत्रों से ग्राम समाज एवं पट्टे के खेतों की मिट्टी
बाराबंकी नगर में पटायी के काम मंे लायी जा रही है। ऐसा नही कि इस बात की
जानकारी सीडीओ साहबान को नही है। अरे भाई, जब आपके घर के सामने धड़-धड़ाते
डम्फर रात भर चिल्ल-पों मचायेंगे तो क्या सुकून से नींद आयेगी। लेकिन हो
सकता है आती हो। कारण कुछ करने की हिम्मत नही है। बाराबंकी में पैसा खूब
है। हर आदमी पेट के लिये ही तो सब कुछ करता है। तो फिर अपने पेट पर लात
कौन मारेगा। सब कुछ पता है लेकिन बोलने से कोई फायदा नही है। खनन माफिया
पर सत्ता मेहरबान है। प्रशासन जान कर अंजान है। खबरनवीस लिखते-लिखते
परेशान हैं। लेकिन जनाब यही तो हिंदुस्तान है। यहां नियम कानून से ज्यादा
रुतबे की मानी जाती है। ओहदा पहले होता है। नियम तो बाद में भी पालन किये
जा सकते हैं। गौर करने वाली बात यह नही कि मिट्टी आ कहां से रही है। गौर
करने वाली बात यह है कि मिट्टी गिरायी कहां जा रही है। अभी तक तो कह सकते
थे कि डम्फर कहां चल रहे हैं, मिट्टी कहां खुद रही है, कौन से अनियमित
काम हो रहे हैं। तो जनाब तीनों सवालों के जवाब हैं। डम्फर सतरिख से
बाराबंकी चल रहे हैं। मिट्टी सरांय अकबराबाद में खुद रही है और रही बात
अनियमित काम की तो जब पब्लिक जानती है तो सरकार आप कैसे नही जानते हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि अभी कुछ दिन पूर्व तनिक जागरुकता दिखाने पर
कुछ समय के लिये अवैध मिट्टी पटायी का कार्य रोक दिया गया था। लेकिन
अखबारों की चुप्पी देख खनन माफिया फिर सक्रिय हो गये।
मिट्टी खनन पर एडीएम मौन
बाराबंकी। नगर क्षेत्र में देर रात मिट्टी लेकर धड़-धड़ाने वाले डम्फरों की
सुध प्रशासन लेना ही नही चाहता। खनन पर अंकुश लगाने वाले स्वयं खनन के
बारे में कोई बात करना ही नही चाहते। अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया से
जब सीडीओ आवास के सामने अवैध रुप से हो रही मिट्टी पटायी के बारे मंे बात
करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल फोन रिसीव करने के बाद व्यस्तता का
हवाला देते हुए फोन काट दिया गया।
खनन माफिया पर खादी का वरदहस्त, खाकी मौन
सीडीओ आवास के सामने हो रही अवैध मिट्टी की पटाई
बाराबंकी। जनाब, कभी सुना है कि मिट्टी का भी तबादला होता है। रसूख के दम
पर रुतबा बुलंद किया जाता है और मिट्टी का भी तबादला कर दिया जाता है।
सत्ता की हनक के आगे सब बेकार। नौकरशाहों की हिम्मत ही क्या जो चूँ कर
दें। चाहें खाकी हो या मिट्टी खादी जब चाहे जिसे चाहे जहां चाहे भेज दे।
क्या मजाल कोई इंकार कर दे। सूबा राजधानी का सबसे करीबी बाराबंकी सबसे
ज्यादा खादी की गिरफ्त में है। कोई जरुरी नही कि सत्ता के गलियारे में
लालबत्ती से चलने वाला कोई खद्दरधारी हो। जनाब, यहां के जन प्रतिनिधि भी
खुद को सीएम से कम नही समझते। बस एक टैग ही तो लगना है। वो भी लगा लगाया
है। खनन माफियाओं को ऐेसे ही एक खादी की सरपरस्ती मिली हुई है। कोतवाली
नगर और थाना सतरिख की जुगलबंदी कहें या फिर खादी का दोनो जगह उम्दा दबाव,
मिट्टी का ट्रांसफर भी हो रहा है। वो भी किसी ऐसे वैसे प्लाट में नही।
मुख्य विकास अधिकारी के बंगले के ठीक सामने अवैध खनन की जाने वाली मिट्टी
रातो-रात डम्फरों से थाना सतरिख क्षेत्र से यहां लायी जा रही है। इसके
लिये भी कोई खास क्षेत्र बटा नही है। थाना सतरिख के ग्राम सरांय अकबराबाद
सहित कई अन्य क्षेत्रों से ग्राम समाज एवं पट्टे के खेतों की मिट्टी
बाराबंकी नगर में पटायी के काम मंे लायी जा रही है। ऐसा नही कि इस बात की
जानकारी सीडीओ साहबान को नही है। अरे भाई, जब आपके घर के सामने धड़-धड़ाते
डम्फर रात भर चिल्ल-पों मचायेंगे तो क्या सुकून से नींद आयेगी। लेकिन हो
सकता है आती हो। कारण कुछ करने की हिम्मत नही है। बाराबंकी में पैसा खूब
है। हर आदमी पेट के लिये ही तो सब कुछ करता है। तो फिर अपने पेट पर लात
कौन मारेगा। सब कुछ पता है लेकिन बोलने से कोई फायदा नही है। खनन माफिया
पर सत्ता मेहरबान है। प्रशासन जान कर अंजान है। खबरनवीस लिखते-लिखते
परेशान हैं। लेकिन जनाब यही तो हिंदुस्तान है। यहां नियम कानून से ज्यादा
रुतबे की मानी जाती है। ओहदा पहले होता है। नियम तो बाद में भी पालन किये
जा सकते हैं। गौर करने वाली बात यह नही कि मिट्टी आ कहां से रही है। गौर
करने वाली बात यह है कि मिट्टी गिरायी कहां जा रही है। अभी तक तो कह सकते
थे कि डम्फर कहां चल रहे हैं, मिट्टी कहां खुद रही है, कौन से अनियमित
काम हो रहे हैं। तो जनाब तीनों सवालों के जवाब हैं। डम्फर सतरिख से
बाराबंकी चल रहे हैं। मिट्टी सरांय अकबराबाद में खुद रही है और रही बात
अनियमित काम की तो जब पब्लिक जानती है तो सरकार आप कैसे नही जानते हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि अभी कुछ दिन पूर्व तनिक जागरुकता दिखाने पर
कुछ समय के लिये अवैध मिट्टी पटायी का कार्य रोक दिया गया था। लेकिन
अखबारों की चुप्पी देख खनन माफिया फिर सक्रिय हो गये।
मिट्टी खनन पर एडीएम मौन
बाराबंकी। नगर क्षेत्र में देर रात मिट्टी लेकर धड़-धड़ाने वाले डम्फरों की
सुध प्रशासन लेना ही नही चाहता। खनन पर अंकुश लगाने वाले स्वयं खनन के
बारे में कोई बात करना ही नही चाहते। अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया से
जब सीडीओ आवास के सामने अवैध रुप से हो रही मिट्टी पटायी के बारे मंे बात
करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल फोन रिसीव करने के बाद व्यस्तता का
हवाला देते हुए फोन काट दिया गया।
