अभिलेखो में दर्ज तालाब जमीन से हो गये गायब
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रामसनेहीघाट, बाराबंकी। तहसील क्षेत्र के जेठौती राजपूतान गावं में
राजस्व अभिलेखो में दर्ज 26 तालाबों में करीब एक दर्जन तालाबों का नाम
निशान मिट गया है जिसकी शिकायत कई बार एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी तक की
जा चुकी है लेकिन अभी तक तालबो को अतिक्रमण मुक्त नही कराया जा सका है।
जिसके चलते तालाबों का अस्तित्व संकट के बादल मडराने लगे है। मालूम हो कि
जहां एक तरफ सरकार मनरेगा के तहत तालाब खुदवा रही है। वहीं कस्बों सहित
गांवों मे तालाबो को पाटकर दुकान मकान बनाये जा रहे है। अवैध कब्जे की
जानकारी सिर्फ अभिलेखों के जरिये ही पता लगाया जा सकता है कि कहां और किस
गांटा संख्या पर तालाब दर्ज है। भूजल संकट पर काबू पाने के लिए माननीय
न्यायालय व सरकार भले ही चिंतित है किन्तु प्रशासन पूरी तरह बेफिक्र है।
मुकामी तहसील रामसनेहीघाट के राजस्व आकडो के आधार पर गौर किया जाय तो
प्रशासन का दावा है कि मौजूदा समय में क्षेत्र के सभी तालाबो से अतिक्रमण
हटवा दिया गया है। परन्तु हकीकत पूर्णतयः इसके विपरीत है। जानकारी के
अनुसार 25 जुलाई 2011 को सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को 1 जुलाई 1952 को
आधार मानकर तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया था सर्वोच्च
न्यायालय के आदेश मे स्पष्ट उल्लेख था कि अगर किसी तालाब पर अवैध कब्जा
हो तो उसे हटावा कर पुनः तालाब में परिवर्तित करा दिया जाय इसके अतिरिक्त
उच्च न्यायलय ने 25 फरवरी 2005 को भी एक आदेश दिया था कि हर माह तालाबों
की स्थित की समीक्षा की जाय तथा इसकी रिर्पोट शासन को भेजा दिया जाय
निर्देश के बाद थोडे समय तक तो प्रसासनिक अमले ने निर्देश का पालन किया
उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश हवा में उडने लगा तथा तालाबों पर
लगातार कब्जा करने वालो की होड लगी हुई। रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र की
तीनों विकास खण्डो मे 1950 से पूर्व 3410 झील व तालाब थे जिनका क्षेत्रफल
लगभग 200 हेक्टयर था तालाबों की संख्या 2007 मे बढकर 4392 जो 982
क्षेत्रफल ज्यादा हो गया। अगर उस समय के सरकारी आकडो पर गौर किया जाय तो
लगभग आधे हेक्टेयर क्षेत्रफल के तालाबों पर तमाम लोगो ने कब्जा कर रखा है
दरियाबाद में तालाबों पर अवैध कब्जा करने वालो की लम्बी लिस्ट है।
दरियाबाद के जेठौती राजपूतान ग्राम सभा में सरकारी आंकडो में 26 तालाब
दर्ज है लेकिन इन तालाबों में करीब एक दर्जन तालाबों का अस्तित्व खत्म हो
चुका है वही कई तालाबों पर लोगो द्वारा मकान, आदि बना कर अपना कब्जा कर
रखा। यहां के ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन से तालाब को अतिक्रमण
मुक्त करानी की मांग की। ग्रामीणों ने एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी तक दौड
लगाई लेकिन ग्रामीणों की इस लम्बी दौड का नतीजा शून्य ही रहा। अगर अगर
कोई भी तालाबो पर हो रहे अवैध कब्जे के बारे में जानकारी लेता है तो अवैध
कब्जे को लेकर प्रशासन नियमो का पाठ बताता है। क्षेत्र के जेठौती
राजपूतान, असेना, चन्दौली, भानपुर, बहरेला, तिवारीपुर, हथौधा, कोटवासडक,
आदि गॉवों व कस्बों में कई तालाबो का नामो निशान मिट गया है तथा कई तालाब
पटने के कगार पर पहुच गये है ै। इस संबंध मे उपजिलाधिकारी अर्चना वर्मा
से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होने बताया कि अभियान चलाकर तालाबो
को अतिक्रमण मुक्त करा दिया जायेगा तथा अतिक्रमण करने वालो पर विधिक
कार्यवाही की जायेगी।
राजस्व अभिलेखो में दर्ज 26 तालाबों में करीब एक दर्जन तालाबों का नाम
निशान मिट गया है जिसकी शिकायत कई बार एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी तक की
जा चुकी है लेकिन अभी तक तालबो को अतिक्रमण मुक्त नही कराया जा सका है।
जिसके चलते तालाबों का अस्तित्व संकट के बादल मडराने लगे है। मालूम हो कि
जहां एक तरफ सरकार मनरेगा के तहत तालाब खुदवा रही है। वहीं कस्बों सहित
गांवों मे तालाबो को पाटकर दुकान मकान बनाये जा रहे है। अवैध कब्जे की
जानकारी सिर्फ अभिलेखों के जरिये ही पता लगाया जा सकता है कि कहां और किस
गांटा संख्या पर तालाब दर्ज है। भूजल संकट पर काबू पाने के लिए माननीय
न्यायालय व सरकार भले ही चिंतित है किन्तु प्रशासन पूरी तरह बेफिक्र है।
मुकामी तहसील रामसनेहीघाट के राजस्व आकडो के आधार पर गौर किया जाय तो
प्रशासन का दावा है कि मौजूदा समय में क्षेत्र के सभी तालाबो से अतिक्रमण
हटवा दिया गया है। परन्तु हकीकत पूर्णतयः इसके विपरीत है। जानकारी के
अनुसार 25 जुलाई 2011 को सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को 1 जुलाई 1952 को
आधार मानकर तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया था सर्वोच्च
न्यायालय के आदेश मे स्पष्ट उल्लेख था कि अगर किसी तालाब पर अवैध कब्जा
हो तो उसे हटावा कर पुनः तालाब में परिवर्तित करा दिया जाय इसके अतिरिक्त
उच्च न्यायलय ने 25 फरवरी 2005 को भी एक आदेश दिया था कि हर माह तालाबों
की स्थित की समीक्षा की जाय तथा इसकी रिर्पोट शासन को भेजा दिया जाय
निर्देश के बाद थोडे समय तक तो प्रसासनिक अमले ने निर्देश का पालन किया
उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश हवा में उडने लगा तथा तालाबों पर
लगातार कब्जा करने वालो की होड लगी हुई। रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र की
तीनों विकास खण्डो मे 1950 से पूर्व 3410 झील व तालाब थे जिनका क्षेत्रफल
लगभग 200 हेक्टयर था तालाबों की संख्या 2007 मे बढकर 4392 जो 982
क्षेत्रफल ज्यादा हो गया। अगर उस समय के सरकारी आकडो पर गौर किया जाय तो
लगभग आधे हेक्टेयर क्षेत्रफल के तालाबों पर तमाम लोगो ने कब्जा कर रखा है
दरियाबाद में तालाबों पर अवैध कब्जा करने वालो की लम्बी लिस्ट है।
दरियाबाद के जेठौती राजपूतान ग्राम सभा में सरकारी आंकडो में 26 तालाब
दर्ज है लेकिन इन तालाबों में करीब एक दर्जन तालाबों का अस्तित्व खत्म हो
चुका है वही कई तालाबों पर लोगो द्वारा मकान, आदि बना कर अपना कब्जा कर
रखा। यहां के ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन से तालाब को अतिक्रमण
मुक्त करानी की मांग की। ग्रामीणों ने एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी तक दौड
लगाई लेकिन ग्रामीणों की इस लम्बी दौड का नतीजा शून्य ही रहा। अगर अगर
कोई भी तालाबो पर हो रहे अवैध कब्जे के बारे में जानकारी लेता है तो अवैध
कब्जे को लेकर प्रशासन नियमो का पाठ बताता है। क्षेत्र के जेठौती
राजपूतान, असेना, चन्दौली, भानपुर, बहरेला, तिवारीपुर, हथौधा, कोटवासडक,
आदि गॉवों व कस्बों में कई तालाबो का नामो निशान मिट गया है तथा कई तालाब
पटने के कगार पर पहुच गये है ै। इस संबंध मे उपजिलाधिकारी अर्चना वर्मा
से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होने बताया कि अभियान चलाकर तालाबो
को अतिक्रमण मुक्त करा दिया जायेगा तथा अतिक्रमण करने वालो पर विधिक
कार्यवाही की जायेगी।

